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Saahir
ik dafa chamka tha jugnuon ki jagah
ik dafa chamka tha jugnuon ki jagah | इक दफ़ा चमका था जुगनुओं की जगह
- Saahir
इक
दफ़ा
चमका
था
जुगनुओं
की
जगह
सो
जलाया
गया
मैं
दियों
की
जगह
तुमको
दिल
में
बसाने
पे
हैरानी
है
जेल
में
होती
है
क़ातिलों
की
जगह
- Saahir
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किसी
को
घर
से
निकलते
ही
मिल
गई
मंज़िल
कोई
हमारी
तरह
उम्र
भर
सफ़र
में
रहा
Ahmad Faraz
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ज़िंदगी
फ़िरदौस-ए-गुम-गश्ता
को
पा
सकती
नहीं
मौत
ही
आती
है
ये
मंज़िल
दिखाने
के
लिए
Hafeez Jalandhari
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कटते
भी
चलो,
बढ़ते
भी
चलो,
बाज़ू
भी
बहुत
हैं,
सर
भी
बहुत
चलते
भी
चलो
कि
अब
डेरे
मंज़िल
ही
पे
डाले
जाएँगे
Faiz Ahmad Faiz
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ये
दुनिया
है
यहाँ
कोई
जगह
ख़ाली
नहीं
रहती
किसी
के
आने-जाने
से
कभी
कुछ
कम
नहीं
होता
Bashir Badr
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हमारा
दिल
तो
हमेशा
से
इक
जगह
पर
है
तुम्हारा
दर्द
ही
रस्ता
भटक
गया
होगा
Zubair Ali Tabish
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मुझ
में
थोड़ी
सी
जगह
भी
नहीं
नफ़रत
के
लिए
मैं
तो
हर
वक़्त
मोहब्बत
से
भरा
रहता
हूँ
Mirza Athar Zia
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'फ़ैज़'
थी
राह
सर-ब-सर
मंज़िल
हम
जहाँ
पहुँचे
कामयाब
आए
Faiz Ahmad Faiz
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बिछड़
कर
मुझ
सेे
तुझको
क्या
मिला
है
कि
जो
कुछ
था
वो
भी
खोना
पड़ा
है
गया
था
जिस
जगह
पर
छोड़
कर
तू
उसी
रस्ते
पे
दिल
अब
भी
खड़ा
है
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ATUL SINGH
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सुब्ह-ओ-शाम
अब
हमको
बस
उदास
रहना
है
ग़मज़दों
की
मंज़िल
का
रास्ता
उदासी
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल,
तो
जुस्तजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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मेरे
ख़यालों
में
ही
पक्कापन
है
मेरी
उम्र
अभी
भी
कच्ची
है
दोस्त
Saahir
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हम
दोनों
को
एक
किया
है
कुछ
ऐसे
भी
मैंने
अपनी
इक
तस्वीर
लगाई
तेरे
दिए
छल्ले
में
Saahir
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देख
कर
लगता
है
क्या
नस
काटी
थी
मैंने
हाँ
मगर
ये
भी
किया
था
वाक़ई
मैंने
एक
दिन
वो
ख़ूब
रोई
मेरे
रोने
पतब
से
बस
हँस
के
गुज़ारी
ज़िंदगी
मैंने
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Saahir
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मुझको
ही
वक़्त
जो
देता
था,
था
कभी
इश्क़
में
मैं
भी
था
मुब्तिला,
था
कभी
Saahir
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रस्सियाँ
हैं
और
पंखें
भी
हैं
घर
में
है
नहीं
सामान
पर
ये
ख़ुद-कुशी
का
Saahir
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