be-zameeroon ke kabhi jhaanse men main aata nahin | बे-ज़मीरों के कभी झाँसे में मैं आता नहीं

  - Ibrat Bahraichi
बे-ज़मीरोंकेकभीझाँसेमेंमैंआतानहीं
मुश्किलोंकीभीड़सेहरगिज़मैंघबरातानहीं
मुझसेअबअपनीज़बाँसेकुछकहाजातानहीं
जुर्मकरकेभीकोईमुजरिमसज़ापातानहीं
मेरीख़ुद्दारीसदाकरतीहैमेरीरहबरी
मैंकभीपत्थरसेअपनेसरकोटकरातानहीं
हक़-शनासीमेरामस्लकहक़-परस्तीमेराकाम
मैंखिलौनोंसेकभीदिलअपनाबहलातानहीं
पेड़जोदेताहैसायाधूपमेंरहताहैवो
रौशनीदेताहैजोवोरौशनीपातानहीं
आदमीकेपासख़ुदज़ातीमसाइलहैंबहुत
दूसरोंकेअबमसाइलकोईसुलझातानहीं
आरज़ूओंकेचराग़ोंकोबुझाबैठाहूँमैं
कोईइंसाँकेमेरेदिलकोबहलातानहीं
  - Ibrat Bahraichi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy