यूँँहीबढ़तीरहेंगीअगरतल्ख़ियाँ
तोड़डालेंगीमेरायेघरतल्ख़ियाँ
रखतोदूँबाला-ए-ताक़अपनीअना
रोकदेतीहैंमुझकोमगरतल्ख़ियाँ
ज़िन्दगी!क्यामोहब्बतयहींख़त्महै?
बढ़रहीहैयहाँकिसक़दरतल्ख़ियाँ
अबकिसीकोकोईचाहताहीनहीं
करगईहैंदिलोंमैंयूँँघरतल्ख़ियाँ
इनपेचाहतकीपरतेंचढ़ादूँगामैं
चढ़गईंमेरेहत्थेअगरतल्ख़ियाँ
इसक़दरख़ुदकोअफ़ज़लबनाएँगेहम
करसकेंगीनहमपेअसरतल्ख़ियाँ