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Paplu Lucknawi
masaail to bahut se hain magar bas ek hi hal hai
masaail to bahut se hain magar bas ek hi hal hai | मसाइल तो बहुत से हैं मगर बस एक ही हल है
- Paplu Lucknawi
मसाइल
तो
बहुत
से
हैं
मगर
बस
एक
ही
हल
है
सहरस
शाम
तक
सर
मेरा
है
बेगम
की
चप्पल
है
मेरे
मालिक
भला
इस
सेे
बुरी
भी
क्या
सज़ा
होगी
मेरा
शादीशुदा
होना
ही
दोज़ख़
की
रिहर्सल
है
- Paplu Lucknawi
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ख़्वाहिश
सुखाने
रक्खी
थी
कोठे
पे
दोपहर
अब
शाम
हो
चली
मियाँ
देखो
किधर
गई
Adil Mansuri
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हम
बहुत
दूर
निकल
आए
हैं
चलते
चलते
अब
ठहर
जाएँ
कहीं
शाम
के
ढलते
ढलते
Iqbal Azeem
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तू
है
सूरज
तुझे
मालूम
कहाँ
रात
का
दुख
तू
किसी
रोज़
मेरे
घर
में
उतर
शाम
के
बाद
Farhat Abbas Shah
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अब
शहर
की
थकावट
बेचैन
कर
रही
है
अब
शाम
हो
गई
है
चल
माँ
से
बात
कर
लें
Akash Rajpoot
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शाम
थी
हिज्र
की
हाल
मत
पूछना
आँख
थकने
लगे
तो
जिगर
रो
पड़े
Piyush Mishra 'Aab'
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शाम-ए-ग़म
करवट
बदलता
ही
नहीं
वक़्त
भी
ख़ुद्दार
है
तेरे
बग़ैर
Shakeel Badayuni
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शाम
भी
हो
गई
धुँदला
गई
आँखें
भी
मिरी
भूलने
वाले
मैं
कब
तक
तिरा
रस्ता
देखूँ
Parveen Shakir
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बाक़ी
सारे
काम
भुलाकर
इश्क़
किया
सुब्ह
से
लेकर
शाम
बराबर
इश्क़
किया
ग़लती
ये
थोड़े
थी
इश्क़
किया
हम
ने
ग़लती
ये
थी
ग़ैर
बिरादर
इश्क़
किया
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Vashu Pandey
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शाम
को
जिस
वक़्त
ख़ाली
हाथ
घर
जाता
हूँ
मैं
मुस्कुरा
देते
हैं
बच्चे
और
मर
जाता
हूँ
मैं
Rajesh Reddy
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मगर
गुज़ारनेवालों
के
दिन
गुज़रते
हैं
तेरे
फ़िराक़
में
यूँँ
सुबह-ओ-शाम
करते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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जिस
फ़िल्म
का
हीरो
मुझे
होना
था
ऐ
पपलू
उस
फिल्म
के
दो
दिन
से
टिकट
बेच
रहा
हूँ
हर
काम
पुलिस
वालों
की
मर्ज़ी
से
करूँँगा
दारू
भी
मैं
थाने
के
निकट
बेच
रहा
हूँ
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Paplu Lucknawi
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मैं
क्या
करूँँ
मेरी
बेगम
सुहाग
ढूँढे
है
मेरे
बुझे
हुए
चूल्हे
में
आग
ढूँढ़े
है
वो
दिन
गए
कि
उड़ाते
थे
फ़ाख़्ताएँ
हम
सपेरा
चूहे
के
इक
बिल
में
नाग
ढूँढे
है
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Paplu Lucknawi
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न
तेरे
आने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
न
दिल
लगाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
क़सम
ख़ुदा
की
बताता
हूँ
राज़
ये
तुमको
नहारी
खाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
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Paplu Lucknawi
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मुझे
भी
अपनी
क़िस्मत
पर
हमेशा
नाज़
रहता
है
सुना
है
ख़्वाहिशें
उनकी
भी
शर्मिंदा
नहीं
रहती
सुना
है
वो
भी
अब
तक
खाए
बैठी
हैं
कई
शौहर
बहुत
दिन
तक
मेरी
भी
बीवियाँ
ज़िंदा
नहीं
रहती
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Paplu Lucknawi
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खद्दर
पहन
के
बेच
रहा
था
शराब
वो
देखा
मुझे
तो
हाथ
में
झंडा
उठा
लिया
मैं
भी
कोई
गँवार
सिपाही
न
था
जनाब
मैंने
भी
जाम
फेंक
के
डंडा
उठा
लिया
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Paplu Lucknawi
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