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Farhat Abbas Shah
tu hai suraj tujhe maaloom kahaan raat ka dukh
tu hai suraj tujhe maaloom kahaan raat ka dukh | तू है सूरज तुझे मालूम कहाँ रात का दुख
- Farhat Abbas Shah
तू
है
सूरज
तुझे
मालूम
कहाँ
रात
का
दुख
तू
किसी
रोज़
मेरे
घर
में
उतर
शाम
के
बाद
- Farhat Abbas Shah
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यतीमों
की
तरह
बस
पाल
रक्खा
है
इन्हें
हमने
हमें
जो
दुख
मिले
हैं
वो
हमारे
दुख
नहीं
लगते
किसी
की
आँख
में
रहकर
किसी
के
ख़्वाब
देखे
हैं
हजारों
कोशिशें
की
पर
किनारे
दुख
नहीं
लगते
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Rohit Gustakh
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पास
जब
तक
वो
रहे
दर्द
थमा
रहता
है
फैलता
जाता
है
फिर
आँख
के
काजल
की
तरह
Parveen Shakir
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भला
तुम
कैसे
जानोगे
मिला
है
दर्द
जो
गहरा
वो
जैसे
नोचता
है
बाल
अपने
नोच
कर
देखो
Kushal "PARINDA"
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दुनिया
ने
तेरी
याद
से
बेगाना
कर
दिया
तुझ
से
भी
दिल-फ़रेब
हैं
ग़म
रोज़गार
के
Faiz Ahmad Faiz
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ये
ग़म
हमको
पत्थर
कर
देगा
इक
दिन
कोई
आ
कर
हमें
रुलाओ
पहले
तो
Siddharth Saaz
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ये
किस
मक़ाम
पे
लाई
है
ज़िंदगी
हम
को
हँसी
लबों
पे
है
सीने
में
ग़म
का
दफ़्तर
है
Hafeez Banarasi
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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उनके
दुखों
को
शे'र
में
कहना
तो
था
मगर
लड़के
समझ
न
पाएँ
कभी
लड़कियों
का
दुख
Ankit Maurya
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दिल
ना-उमीद
तो
नहीं
नाकाम
ही
तो
है
लंबी
है
ग़म
की
शाम
मगर
शाम
ही
तो
है
Faiz Ahmad Faiz
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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इक
यही
रौशनी
रौशनी
इम्कान
में
है
तू
अभी
तक
दिल-ए-वीरान
में
है
शोर
बरपा
है
तिरी
यादों
का
रौनक़-ए-हिज्र
बयाबान
में
है
प्यार
और
ज़िंदगी
से
लगता
है
कोई
ज़िंदा-दिली
बे-जान
में
है
आज
भी
तेरे
बदन
की
ख़ुश्बू
तेरे
भेजे
हुए
गुल-दान
में
है
ज़िंदगी
भी
है
मिरी
आँखों
में
मौत
भी
दीदा-ए-हैरान
में
है
दिल
अभी
निकला
नहीं
सीने
से
एक
क़ैदी
अभी
ज़िंदान
में
है
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Farhat Abbas Shah
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ये
झाँक
लेती
है
दिल
से
जो
दूसरे
दिल
में
मेरी
निगाह
में
सारा
कमाल
दर्द
का
है
Farhat Abbas Shah
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ये
जो
ज़िंदगी
है
ये
कौन
है
ये
जो
बेबसी
है
ये
कौन
है
ये
तुम्हारे
लम्स
को
क्या
हुआ
ये
जो
बे-हिसी
है
ये
कौन
है
वो
जो
मेरे
जैसा
था
कौन
था
ये
जो
आप
सी
है
ये
कौन
है
मिरे
चार-सू
मिरे
चार-सू
ये
जो
बेकली
है
ये
कौन
है
मिरे
अंग
अंग
में
बस
गई
ये
जो
शाइ'री
है
ये
कौन
है
वो
जो
तीरगी
थी
वो
कौन
थी
ये
जो
रौशनी
है
ये
कौन
है
मुझे
क्या
ख़बर
मुझे
क्या
पता
ये
जो
बे-ख़ुदी
है
ये
कौन
है
वो
जो
ग़म
से
चूर
था
कौन
था
जो
ख़ुशी
ख़ुशी
है
ये
कौन
है
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Farhat Abbas Shah
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उसे
ज़ियादा
ज़रूरत
थी
घर
बसाने
की
वो
आ
के
मेरे
दर-ओ-बाम
ले
गया
मुझ
से
Farhat Abbas Shah
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है
किसी
जालिम
उदू
की
घात
दरवाज़े
में
है
या
मसाफ़त
है
नई
या
रात
दरवाज़े
में
है
जिस
तरहा
उठती
है
नजरें
बे-इरादा
बार-बार
साफ़
लगता
है
के
कोई
बात
दरवाजे
में
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Farhat Abbas Shah
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