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Rohit Gustakh
yatiimon ki tarah bas paal rakha hai inhen hamne
yatiimon ki tarah bas paal rakha hai inhen hamne | यतीमों की तरह बस पाल रक्खा है इन्हें हमने
- Rohit Gustakh
यतीमों
की
तरह
बस
पाल
रक्खा
है
इन्हें
हमने
हमें
जो
दुख
मिले
हैं
वो
हमारे
दुख
नहीं
लगते
किसी
की
आँख
में
रहकर
किसी
के
ख़्वाब
देखे
हैं
हजारों
कोशिशें
की
पर
किनारे
दुख
नहीं
लगते
- Rohit Gustakh
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मेरे
साथ
हँसने
वालों
शरीक
हों
दुख
में
गर
गुलाब
की
ख़्वाहिश
है
तो
चूम
काँटों
को
Neeraj Neer
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तू
भी
कब
मेरे
मुताबिक
मुझे
दुख
दे
पाया
किस
ने
भरना
था
ये
पैमाना
अगर
ख़ाली
था
एक
दुख
ये
कि
तू
मिलने
नहीं
आया
मुझ
सेे
एक
दुख
ये
है
उस
दिन
मेरा
घर
ख़ाली
था
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Tehzeeb Hafi
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उठाओ
कैमरा
तस्वीर
खींच
लो
इन
की
उदास
लोग
कहाँ
रोज़
मुस्कराते
हैं
Malikzada Javed
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ख़ुदा
की
शा'इरी
होती
है
औरत
जिसे
पैरों
तले
रौंदा
गया
है
तुम्हें
दिल
के
चले
जाने
पे
क्या
ग़म
तुम्हारा
कौन
सा
अपना
गया
है
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Ali Zaryoun
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और
भी
दुख
हैं
ज़माने
में
मोहब्बत
के
सिवा
राहतें
और
भी
हैं
वस्ल
की
राहत
के
सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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इस
बात
पर
तू
हाथ
मिला
अब
तेरी
तरह
ग़म
का
लिबास
ओढ़
के
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
shaan manral
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मज़ाक
सहना
नहीं
है
हँसी
नहीं
करनी
उदास
रहने
में
कोई
कमी
नहीं
करनी
Swapnil Tiwari
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आँख
में
नम
तक
आ
पहुँचा
हूँ
उसके
ग़म
तक
आ
पहुँचा
हूँ
पहली
बार
मुहब्बत
की
थी
आख़री
दम
तक
आ
पहुँचा
हूँ
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Khalil Ur Rehman Qamar
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ग़म
है
तो
कोई
लुत्फ़
नहीं
बिस्तर-ए-गुल
पर
जी
ख़ुश
है
तो
काँटों
पे
भी
आराम
बहुत
है
Kaleem Aajiz
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ग़म-ए-दुनिया
भी
ग़म-ए-यार
में
शामिल
कर
लो
नश्शा
बढ़ता
है
शराबें
जो
शराबों
में
मिलें
Ahmad Faraz
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मोहब्बत
को
पराई
कर
रही
हो
सुना
है
तुम
सगाई
कर
रही
हो
यहाँ
बस
ज़िंदगी
इक
तीरगी
है
वहाँ
तुम
मुँह-दिखाई
कर
रही
हो
क़फ़स
मायूस
हो
कर
रो
रहा
है
परिंदे
की
रिहाई
कर
रही
हो
ग़म-ए-दुनिया
से
आगे
कुछ
नहीं
है
जहाँ
तुम
आशनाई
कर
रही
हो
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Rohit Gustakh
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मुहब्बत
में
बिछड़ने
की
ग़लत-फ़हमी
हुई
होगी
वगरना
कौन
करता
है
बग़ावत
राजधानी
में
Rohit Gustakh
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होंठ
तबस्सुम
से
गीले
हैं
जानाँ
यानी
तुमने
कुछ
मीठा
सोचा
है
Rohit Gustakh
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अचानक
ही
परीक्षा
ज़िन्दगी
ने
ली
रिवीजन
भी
नहीं
करने
दिया
मुझको
Rohit Gustakh
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क़िस्मत
में
लिक्खा
था
सो
बनवास
मिला
हमको
वर्ना
जन्में
तो
हम
भी
थे
राजघराने
में
Rohit Gustakh
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