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Swapnil Tiwari
mazaak sahna nahin hai hañsi nahin karne
mazaak sahna nahin hai hañsi nahin karne | मज़ाक सहना नहीं है हँसी नहीं करनी
- Swapnil Tiwari
मज़ाक
सहना
नहीं
है
हँसी
नहीं
करनी
उदास
रहने
में
कोई
कमी
नहीं
करनी
- Swapnil Tiwari
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जिसकी
ख़ातिर
कितनी
रातें
सुलगाई
जिसके
दुख
में
दिल
जाने
क्यूँ
रोता
है
इक
दिन
हम
सेे
पूछ
रही
थी
वो
लड़की
प्यार
में
कोई
पागल
कैसे
होता
है
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Ritesh Rajwada
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जौन
तुम्हें
ये
दौर
मुबारक,
दूर
ग़म-ए-अय्याम
से
हो
एक
पागल
लड़की
को
भुला
कर
अब
तो
बड़े
आराम
से
हो
Jaun Elia
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खुशियाँ
उसी
के
साथ
हैं
जो
ग़म
गुसार
है
ऐसे
हरेक
शख़्स
ही
दुनिया
का
यार
है
Sunny Seher
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हमारे
सैकड़ों
दुख
थे,
और
उस
में
एक
दुख
ये
भी
जो
हम
से
हो
के
गुज़रे
थे,
हमें
दीवार
कहते
थे
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Siddharth Saaz
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वक़्त
अच्छा
भी
आएगा
'नासिर'
ग़म
न
कर
ज़िंदगी
पड़ी
है
अभी
Nasir Kazmi
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बहुत
से
ग़म
समेट
कर
बनाई
एक
डायरी
चुवाव
देख
रात
भर
बनाई
एक
डायरी
ये
हर्फ़
हर्फ़
लफ़्ज़
लफ़्ज़
क़ब्र
है
वरक़
वरक़
दिल-ए-हज़ीं
से
इस
क़दर
बनाई
एक
डायरी
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Aves Sayyad
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उदासी
चल
कहीं
चलते
हैं
दोनों
पिएँगे
चाय
और
बातें
करेंगे
Gaurav Singh
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जब
भी
आता
है
दिसम्बर
ग़म
के
टाँके
खुलते
हैं
याद
है
यूँँ
तेरा
जाना
और
कहना
ख़ुश
रहो
Neeraj Neer
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ग़म
है
तो
कोई
लुत्फ़
नहीं
बिस्तर-ए-गुल
पर
जी
ख़ुश
है
तो
काँटों
पे
भी
आराम
बहुत
है
Kaleem Aajiz
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ख़ुदा
की
शा'इरी
होती
है
औरत
जिसे
पैरों
तले
रौंदा
गया
है
तुम्हें
दिल
के
चले
जाने
पे
क्या
ग़म
तुम्हारा
कौन
सा
अपना
गया
है
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Ali Zaryoun
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मिली
है
राहत
हमें
सफ़र
से
थकन
तो
ले
कर
चले
थे
घर
से
अभी
पलक
पर
पलक
न
बैठी
ये
ख़्वाब
आने
लगे
किधर
से
फ़लक
पे
कुछ
देर
चाँद
ठहरा
विदाअ
लेते
हुए
सहरस
तवील
नॉवेल
में
ज़िंदगी
के
तमाम
क़िस्से
हैं
मुख़्तसर
से
वो
देखते
देखते
ही
इक
दिन
उतर
गया
था
मिरी
नज़र
से
उसी
गली
में
नहीं
गए
बस
गुज़र
गए
हम
इधर
उधर
से
गुज़र-बसर
की
है
कोई
सूरत?
ये
सिर्फ़
होगी
गुज़र-बसर
से
धुएँ
से
'आतिश'
जलेंगी
आँखें
जले
नहीं
हम
इस
एक
डर
से
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Swapnil Tiwari
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जब
गिरे
हम
आसमाँ
से
झूट
के
खुल
न
पाए
बंद
पैराशूट
के
अपना
ही
मेला
सजाने
लग
गए
तुम
हमारी
उँगलियों
से
छूट
के
एक
रस्सी
है
गले
में
मेरे
और
हाथ
में
रेशे
भरे
हैं
जूट
के
मंज़िलों
का
दुख
नया
दुख
था
इन्हें
रो
पड़े
छाले
हमारे
फूट
के
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Swapnil Tiwari
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तुम
सेे
इक
दिन
कहीं
मिलेंगे
हम
ख़र्च
ख़ुद
को
तभी
करेंगे
हम
धूप
निकली
है
तेरी
बातों
की
आज
छत
पर
पड़े
रहेंगे
हम
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Swapnil Tiwari
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तुम
से
इक
दिन
कहीं
मिलेंगे
हम
ख़र्च
ख़ुद
को
तभी
करेंगे
हम
इश्क़!
तुझ
को
ख़बर
भी
है?
अब
के
तेरे
साहिल
से
जा
लगेंगे
हम
किस
ने
रस्ते
में
चाँद
रक्खा
है
उस
से
टकरा
के
गिर
पड़ेंगे
हम
आसमानों
में
घर
नहीं
होते
मर
गए
तो
कहाँ
रहेंगे
हम
धूप
निकली
है
तेरी
बातों
की
आज
छत
पर
पड़े
रहेंगे
हम
जो
भी
कहना
है
उस
को
कहना
है
उस
के
कहने
पे
क्या
कहेंगे
हम
रोक
लेंगे
मुझे
तिरे
आँसू
ऐसे
पानी
पे
क्या
चलेंगे
हम
वो
सुनेगी
जो
सुनना
चाहेगी
जो
भी
कहना
है
वो
कहेंगे
हम
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Swapnil Tiwari
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ये
ज़िंदगी
जो
पुकारे
तो
शक
सा
होता
है
कहीं
अभी
तो
मुझे
ख़ुद-कुशी
नहीं
करनी
Swapnil Tiwari
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