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Paplu Lucknawi
mujhe bhi apni qismat par hamesha naaz rehta hai
mujhe bhi apni qismat par hamesha naaz rehta hai | मुझे भी अपनी क़िस्मत पर हमेशा नाज़ रहता है
- Paplu Lucknawi
मुझे
भी
अपनी
क़िस्मत
पर
हमेशा
नाज़
रहता
है
सुना
है
ख़्वाहिशें
उनकी
भी
शर्मिंदा
नहीं
रहती
सुना
है
वो
भी
अब
तक
खाए
बैठी
हैं
कई
शौहर
बहुत
दिन
तक
मेरी
भी
बीवियाँ
ज़िंदा
नहीं
रहती
- Paplu Lucknawi
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उस
की
ख़्वाहिश
पे
तुम
को
भरोसा
भी
है
उस
के
होने
न
होने
का
झगड़ा
भी
है
लुत्फ़
आया
तुम्हें
गुमरही
ने
कहा
गुमरही
के
लिए
एक
ताज़ा
ग़ज़ल
Irfan Sattar
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मेरे
साथ
हँसने
वालों
शरीक
हों
दुख
में
गर
गुलाब
की
ख़्वाहिश
है
तो
चूम
काँटों
को
Neeraj Neer
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ग़ज़ल
पूरी
न
हो
चाहे,
मग़र
इतनी
सी
ख़्वाहिश
है
मुझे
इक
शे'र
कहना
है
तेरे
रुख़्सार
की
ख़ातिर
Siddharth Saaz
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ख़्वाहिश
सुखाने
रक्खी
थी
कोठे
पे
दोपहर
अब
शाम
हो
चली
मियाँ
देखो
किधर
गई
Adil Mansuri
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हज़ारों
ख़्वाहिशें
ऐसी
कि
हर
ख़्वाहिश
पे
दम
निकले
बहुत
निकले
मिरे
अरमान
लेकिन
फिर
भी
कम
निकले
Mirza Ghalib
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मेरी
ख़्वाहिश
है
कि
आँगन
में
न
दीवार
उठे
मेरे
भाई
मेरे
हिस्से
की
ज़मीं
तू
रख
ले
Rahat Indori
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मदमस्त
महकते
फूलों
को
इन
कलियों
को
चूमा
जाए
इक
ख़्वाहिश
मेरी
यह
भी
है
तेरी
गलियों
में
घूमा
जाए
Akash Rajpoot
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जो
ये
मुमकिन
नहीं
कलयुग
में
राम
हो
जाऊँ
मेरी
ख़्वाहिश
है
कि
अब्दुल
कलाम
हो
जाऊँ
Bhaskar Shukla
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मुझ
को
ख़्वाहिश
है
उसी
शान
की
दिवाली
की
लक्ष्मी
देश
में
उल्फ़त
की
शब-ओ-रोज़
रहे
देश
को
प्यार
से
मेहनत
से
सँवारें
मिल
कर
अहल-ए-भारत
के
दिलों
में
ये
'कँवल'
सोज़
रहे
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Kanval Dibaivi
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ख़्वाहिश
सब
रखते
हैं
तुझको
पाने
की
और
फिर
अपनी
अपनी
क़िस्मत
होती
है
Bhaskar Shukla
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मसाइल
तो
बहुत
से
हैं
मगर
बस
एक
ही
हल
है
सहरस
शाम
तक
सर
मेरा
है
बेगम
की
चप्पल
है
मेरे
मालिक
भला
इस
सेे
बुरी
भी
क्या
सज़ा
होगी
मेरा
शादीशुदा
होना
ही
दोज़ख़
की
रिहर्सल
है
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Paplu Lucknawi
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पैसा
कमाने
आते
हैं
सब
राजनीति
में
आता
नहीं
है
कोई
भी
खोने
के
वास्ते
छम्मो
का
मुजरा
सुनते
हैं
नेता
जो
रात
भर
संसद
भवन
में
आते
हैं
सोने
के
वास्ते
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Paplu Lucknawi
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मैं
क्या
करूँँ
मेरी
बेगम
सुहाग
ढूँढे
है
मेरे
बुझे
हुए
चूल्हे
में
आग
ढूँढ़े
है
वो
दिन
गए
कि
उड़ाते
थे
फ़ाख़्ताएँ
हम
सपेरा
चूहे
के
इक
बिल
में
नाग
ढूँढे
है
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Paplu Lucknawi
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जिस
फ़िल्म
का
हीरो
मुझे
होना
था
ऐ
पपलू
उस
फिल्म
के
दो
दिन
से
टिकट
बेच
रहा
हूँ
हर
काम
पुलिस
वालों
की
मर्ज़ी
से
करूँँगा
दारू
भी
मैं
थाने
के
निकट
बेच
रहा
हूँ
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Paplu Lucknawi
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मेरी
जवानी
को
कमज़ोर
क्यूँ
समझते
हो
तुम्हारे
वास्ते
अब
भी
शबाब
बाक़ी
है
ये
और
बात
है
बोतल
ये
गिर
के
टूट
गई
मगर
अभी
भी
ज़रा
सी
शराब
बाक़ी
है
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Paplu Lucknawi
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