jo zehn-o-dil ke zahreeli bahut hain | जो ज़ेहन-ओ-दिल के ज़हरीले बहुत हैं

  - Akhtar Shahjahanpuri
जोज़ेहन-ओ-दिलकेज़हरीलेबहुतहैं
वहीबातोंकेभीमीठेबहुतहैं
चलोअहल-ए-जुनूँकेसाथहोलें
यहाँअहल-ए-ख़िरदसस्तेबहुतहैं
मिरीबे-चेहरगीपरहँसनेवालो
तुम्हारेआइनेधुँदलेबहुतहैं
ज़रायादोंकेहीपत्थरउछालो
नवाह-ए-जाँमेंसन्नाटेबहुतहैं
तिरीबाला-क़दीबदनामहोगी
यहाँकेबाम-ओ-दरनीचेबहुतहैं
शजरबे-सायाहैंसूरजबरहना
मगरहमअज़्मकेपक्केबहुतहैं
करोअबफ़त्हकाएलान'अख़्तर'
सरोंसेसुर्ख़-रूनेज़ेबहुतहैं
  - Akhtar Shahjahanpuri
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