lamha lamha yahii sochun yahii dekha chaahoon | लम्हा लम्हा यही सोचूँ यही देखा चाहूँ

  - Akhtar Shahjahanpuri
लम्हालम्हायहीसोचूँयहीदेखाचाहूँ
तेरीआँखोंमेंतोबसअपनाहीचेहराचाहूँ
येभीक्याबातकिमैंतेरीअनाकीख़ातिर
तेरीक़ामतसेज़ियादातिरासायाचाहूँ
मुझसेउल्फ़तभीनहींहैतोजानेफिरक्यूँँ
तेरीमहफ़िलमेंफ़क़तअपनाहीचर्चाचाहूँ
वोतोगूँगाहैमगरमुझकोयेज़िदहैकैसी
अपनीता'रीफ़मेंकुछउससेभीसुननाचाहूँ
साथदेनेसेहुएजातेहैंक़ासिरअल्फ़ाज़
जानेक्याक्यामैंतिरीशानमेंलिखनाचाहूँ
मैंतोइकऐसामुसाफ़िरहूँजोथकताहीनहीं
अपनीमंज़िलसेभीआगेकोईजादाचाहूँ
दिलसेबादलकभीउठतेहीनहींहैं'अख़्तर'
किसलिएआँखोंसेबहताहुआदरियाचाहूँ
  - Akhtar Shahjahanpuri
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy