agar bulan | अगर बुलंदी का मेरी वो ए'तिराफ़ करे

  - Akhtar Shahjahanpuri
अगरबुलंदीकामेरीवोए'तिराफ़करे
तोफिरज़रूरीहैकरयहाँतवाफ़करे
दिलोंमेंख़्वाहिश-ए-दीदारहोतोलाज़िमहै
जोआइनाभीमुयस्सरहोउसकोसाफ़करे
रहूँगामैंतोहमेशाक़सीदा-ख़्वाँउसका
ज़मींफ़लकसेभलाकैसेइख़्तिलाफ़करे
हिसार-ए-ज़ातसेबाहरनिकलनाहोजिसको
अनाकीआहनीदीवारमेंशिगाफ़करे
जहाँभीक़द्र-शनासीमेंकुछकमीदेखे
वहाँज़रूरीहैख़ुदभीकुछइंकिशाफ़करे
पुरानेवक़्तोंकेकुछलोगअबभीकहतेहैं
बड़ावहीहैजोदुश्मनकोभीमुआ'फ़करे
वोमेरादोस्तभीमुंसिफ़भीहैमगर'अख़्तर'
हरएकफ़ैसलामेरेहीक्यूँँख़िलाफ़करे
  - Akhtar Shahjahanpuri
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