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Abrar Kashif
ab ke ham tark-e-rusoomaat karke dekhte hain
ab ke ham tark-e-rusoomaat karke dekhte hain | अब के हम तर्क-ए-रसूमात करके देखते हैं
- Abrar Kashif
अब
के
हम
तर्क-ए-रसूमात
करके
देखते
हैं
बीच
वालों
के
बिना
बात
करके
देखते
हैं
इस
सेे
पहले
कि
कोई
फ़ैसला
तलवार
करे
आख़िरी
बार
मुलाक़ात
करके
देखते
हैं
- Abrar Kashif
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यार
ने
हम
से
बे-अदाई
की
वस्ल
की
रात
में
लड़ाई
की
Meer Taqi Meer
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गले
मिलना
न
मिलना
तो
तेरी
मर्ज़ी
है
लेकिन
तेरे
चेहरे
से
लगता
है
तेरा
दिल
कर
रहा
है
Tehzeeb Hafi
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नाप
रहा
था
एक
उदासी
की
गहराई
हाथ
पकड़कर
वापस
लायी
है
तन्हाई
वस्ल
दिनों
को
काफ़ी
छोटा
कर
देता
है
हिज्र
बढ़ा
देता
है
रातों
की
लम्बाई
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Tanoj Dadhich
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सुकून
देती
थी
तब
मुझको
वस्ल
की
सिगरेट
अब
उसके
हिज्र
के
फ़िल्टर
से
होंठ
जलते
हैं
Upendra Bajpai
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उस
से
मिलना
तो
उसे
ईद-मुबारक
कहना
ये
भी
कहना
कि
मिरी
ईद
मुबारक
कर
दे
Dilawar Ali Aazar
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तू
दिल
पे
बोझ
ले
के
मुलाक़ात
को
न
आ
मिलना
है
इस
तरह
तो
बिछड़ना
क़ुबूल
है
Unknown
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ज़िंदगी
दूर
ही
हमें
कर
दे
मौत
के
बाद
वस्ल
मुमकिन
है
Akash Panwar
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वो
फ़िराक़
और
वो
विसाल
कहाँ
वो
शब-ओ-रोज़-ओ-माह-ओ-साल
कहाँ
Mirza Ghalib
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आरज़ू
वस्ल
की
रखती
है
परेशाँ
क्या
क्या
क्या
बताऊँ
कि
मेरे
दिल
में
है
अरमाँ
क्या
क्या
Akhtar Shirani
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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मैं
अपने
दोनों
तरफ़
एक
सा
हूँ
तेरे
लिए
किसी
से
शर्त
लगा
फिर
मुझे
उछाल
के
देख
Abrar Kashif
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इस
तरह
तल्ख़
नवाई
से
नहीं
चलता
है
काम
दुनिया
में
बुराई
से
नहीं
चलता
है
प्यार
ज़िंदा
है
ज़माने
में
भले
लोगों
से
प्यार
का
नाम
लड़ाई
से
नहीं
चलता
है
मेरे
बच्चों
की
इबादत
भी
है
इस
में
शामिल
घर
फ़क़त
मेरी
कमाई
से
नहीं
चलता
है
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Abrar Kashif
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वो
तो
अच्छा
है
ग़ज़ल
तेरा
सहारा
है
मुझे
वर्ना
फ़िक्रों
ने
तो
बस
घेर
के
मारा
है
मुझे
जिसकी
तस्वीर
मैं
काग़ज़
पे
बना
भी
न
सका
उसने
मेहँदी
से
हथेली
पे
उतारा
है
मुझे
ग़ैर
के
हाथ
से
मरहम
मुझे
मंज़ूर
नहीं
तुम
मगर
ज़ख़्म
भी
दे
दो
तो
गवारा
है
मुझे
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Abrar Kashif
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घर
की
तक़सीम
में
अँगनाई
गँवा
बैठे
हैं
फूल
गुलशन
से
शनासाई
गँवा
बैठे
हैं
बात
आँखों
से
समझ
लेने
का
दावा
मत
कर
हम
इसी
शौक़
में
बीनाई
गँवा
बैठे
हैं
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Abrar Kashif
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अब
तो
लगता
है
कि
आ
जाएगी
बारी
मेरी
किसने
दे
दी
तेरी
आँखों
को
सुपारी
मेरी
Abrar Kashif
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