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Abrar Kashif
vo to achha hai ghazal teraa sahaara hai mujhe
vo to achha hai ghazal teraa sahaara hai mujhe | वो तो अच्छा है ग़ज़ल तेरा सहारा है मुझे
- Abrar Kashif
वो
तो
अच्छा
है
ग़ज़ल
तेरा
सहारा
है
मुझे
वर्ना
फ़िक्रों
ने
तो
बस
घेर
के
मारा
है
मुझे
जिसकी
तस्वीर
मैं
काग़ज़
पे
बना
भी
न
सका
उसने
मेहँदी
से
हथेली
पे
उतारा
है
मुझे
ग़ैर
के
हाथ
से
मरहम
मुझे
मंज़ूर
नहीं
तुम
मगर
ज़ख़्म
भी
दे
दो
तो
गवारा
है
मुझे
- Abrar Kashif
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आगे
चलकर
जिस
सेे
शादी
करनी
हो
पहले
दिन
से
झूठ
नहीं
कहते
उस
सेे
Tanoj Dadhich
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वो
शादी
तो
करेगी
मगर
एक
शर्त
पर
हम
हिज्र
में
रहेंगे
अगर
नौकरी
नहीं
Harsh saxena
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उनको
दूर
किया
जाता
है
जो
बरसों
के
साथी
हैं
और
अनजाने
लोगों
की
आपस
में
शादी
होती
है
Darpan
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मेहंदी
लगाए
बैठे
हैं
कुछ
इस
अदास
वो
मुट्ठी
में
उन
की
दे
दे
कोई
दिल
निकाल
के
Riyaz Khairabadi
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मैं
उस
को
देख
के
चुप
था
उसी
की
शादी
में
मज़ा
तो
सारा
इसी
रस्म
के
निबाह
में
था
Muneer Niyazi
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इसलिए
ये
महीना
ही
शामिल
नहीं
उम्र
की
जंत्री
में
हमारी
उसने
इक
दिन
कहा
था
कि
शादी
है
इस
फरवरी
में
हमारी
Tehzeeb Hafi
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क्या
जाने
किस
ख़ता
की
सज़ा
दी
गई
हमें
रिश्ता
हमारा
दार
पे
लटका
दिया
गया
शादी
में
सब
पसंद
का
लाया
गया
मगर
अपनी
पसंद
का
उसे
दूल्हा
नहीं
मिला
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Afzal Ali Afzal
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जैसे
तुमने
वक़्त
को
हाथ
में
रोका
हो
सच
तो
ये
है
तुम
आँखों
का
धोख़ा
हो
Tehzeeb Hafi
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कहाँ
रोते
उसे
शादी
के
घर
में
सो
इक
सूनी
सड़क
पर
आ
गए
हम
Shariq Kaifi
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ये
सिंदूर,
मेंहदी,
नथ,
महावर
मुबारक
हो
सितमगर
तुझे
अपना
नया
घर
मुबारक
हो
Harsh saxena
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दिन
में
मिल
लेते
कहीं
रात
ज़रूरी
थी
क्या?
बेनतीजा
ये
मुलाक़ात
ज़रूरी
थी
क्या
मुझ
सेे
कहते
तो
मैं
आँखों
में
बुला
लेता
तुम्हें
भीगने
के
लिए
बरसात
ज़रूरी
थी
क्या
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Abrar Kashif
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दिया
जला
के
सभी
बाम-ओ-दर
में
रखते
हैं
और
एक
हम
हैं
इसे
रह-गुज़र
में
रखते
हैं
समुंदरों
को
भी
मालूम
है
हमारा
मिज़ाज
कि
हम
तो
पहला
क़दम
ही
भँवर
में
रखते
हैं
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Abrar Kashif
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अब
तो
लगता
है
कि
आ
जाएगी
बारी
मेरी
किसने
दे
दी
तेरी
आँखों
को
सुपारी
मेरी
Abrar Kashif
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अपने
दिल
में
बसाओगे
हमको
और
गले
से
लगाओगे
हमको
हम
नहीं
इतने
प्यार
के
क़ाबिल
तुम
तो
पागल
बनाओगे
हमको
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Abrar Kashif
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मैं
अपने
दोनों
तरफ़
एक
सा
हूँ
तेरे
लिए
किसी
से
शर्त
लगा
फिर
मुझे
उछाल
के
देख
Abrar Kashif
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