qismat men dard hai to davaa hi na laaunga | क़िस्मत में दर्द है तो दवा ही न लाऊँगा

  - Akhtar Shahjahanpuri
क़िस्मतमेंदर्दहैतोदवाहीलाऊँगा
आईना-ए-यकींपेसियाहीलाऊँगा
यातोमिरेबयानपेमुंसिफ़यक़ींकरे
याफिरसज़ालिखेमैंगवाहीलाऊँगा
इसदौर-ए-ना-शनासमेंकुछभीकहूँमगर
अबदास्ताँमेंज़िक्र-ए-वफ़ाहीलाऊँगा
अपनोंसेजंगहैतोभलेहारजाऊँमैं
लेकिनमैंअपनेसाथसिपाहीलाऊँगा
दोश-ए-करमपेबारहैजबहर्फ़-ए-मुद्दआ'
फिरमैंज़बाँपेहर्फ़-ए-दुआहीलाऊँगा
जबतुमसफ़-ए-अदूमेंचलेजाओगेतोफिर
दिलमेंमलाल-ए-कोर-निगाहीलाऊँगा
मैदान-ए-कार-ज़ारमें'अख़्तर'कभीभीमैं
ख़ौफ़-ए-सिनान-ए-ज़िल्ल-ए-इलाहीलाऊँगा
  - Akhtar Shahjahanpuri
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