vaqt be-rehm hai maqtal ki zameenon jaisa | वक़्त बे-रहम है मक़्तल की ज़मीनों जैसा

  - Akhtar Shahjahanpuri
वक़्तबे-रहमहैमक़्तलकीज़मीनोंजैसा
औरहमदर्दहैमुख़्लिसकीदु'आओंजैसा
कोईमंज़रनहींबरसातकेमौसममेंभी
उसकीज़ुल्फ़ोंसेफिसलतीहुईधूपोंजैसा
आबलोंकीतरहरहनेदियाअश्कोंको
मेरीपलकोंनेकियाकामबबूलोंजैसा
संग-दिलहैफ़रेबीजफ़ाकारहैवो
मेरामहबूबहैमा'सूमफ़रिश्तोंजैसा
मैंतोइंसानहूँतुमजैसाहूँठहरोलोगों
मुझपेइल्ज़ामलगाओरसूलोंजैसा
ज़ेहनसेमहवहुएगुज़राज़माना'अख़्तर'
एकचेहराहैमगरअबभीगुलाबोंजैसा
  - Akhtar Shahjahanpuri
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