jo palkon par mirii thehra hua hai | जो पलकों पर मिरी ठहरा हुआ है

  - Akhtar Shahjahanpuri
जोपलकोंपरमिरीठहराहुआहै
वोआँसूख़ूनमेंडूबाहुआहै
फ़रिश्तेख़्वानलेकररहेहैं
सहीफ़ाताक़मेंरक्खाहुआहै
कोईअनहोनीशायदहोगईफिर
ग़ुबार-ए-कारवाँठहराहुआहै
किसीकीख़्वाहिशेंपा-बस्ताकरके
येकबसोचाहरमरुस्वाहुआहै
वोइकलम्हाजोतेरेवस्लकाथा
बयाज़-ए-हिज्रपरलिक्खाहुआहै
मुझेभीहोगयाइरफ़ान-ए-ज़ातअब
मुक़ाबिलआइनारक्खाहुआहै
अयादतकरनेसबआएहैं'अख़्तर'
तिराचेहरामगरउतराहुआहै
  - Akhtar Shahjahanpuri
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