jab mukhalif miraa raaz-daan ho gaya | जब मुख़ालिफ़ मिरा राज़-दाँ हो गया

  - Akhtar Shahjahanpuri
जबमुख़ालिफ़मिराराज़-दाँहोगया
राज़-ए-सर-बस्तासबपरअयाँहोगया
मुझकोएहसास-ए-शर्मिंदगीहैबहुत
क़िस्सा-ए-दर्दकैसेबयाँहोगया
कितनीहसरतसेतकतीरहीहरख़ुशी
औरदामनमिराधज्जियाँहोगया
मसअलाबनगईफ़िक्रतफ़्हीमका
लफ़्ज़काहुस्नभीराएगाँहोगया
लोगयेसोचकेहीपरेशानहैं
मैंज़मींथातोक्यूँँआसमाँहोगया
शिकवा-संजान-ए-तन्हाईहैंसबकेसब
मेराग़मभीग़म-ए-दो-जहाँहोगया
पेड़क्यामेरेआँगनका'अख़्तर'गिरा
लोगसमझेकिमैंबे-अमाँहोगया
  - Akhtar Shahjahanpuri
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