फिरदिलकेआइनेमेंउतरनेलगीहोतुम
शीशेकीधूलउड़ाकेसँवरनेलगीहोतुम
मेरेलिएतोपँखसेहल्कीहोआजभी
कुछलोगकहरहेथेकिभरनेलगीहोतुम
येरूपयेलचकयेचमकऔरयेनमक
शादीकेबा'दऔरनिखरनेलगीहोतुम
मैंकोएलेकीतरहसुलगनेलगाहूँजान
लोबानकेधुएँसीबिखरनेलगीहोतुम
अक्सरमैंदेखताहूँकिशीशेकेशहरस
पत्थरकीपालकीमेंगुज़रनेलगीहोतुम
किससेकहूँकिरूहकेकाग़ज़पेआज-कल
चिंगारियोंकीतरहठहरनेलगीहोतुम
गीलीहैमेरीआँखतोक्यादिलकेदेसमें
पानीकेरास्तेसेउतरनेलगीहोतुम