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Harsh saxena
mujhko ghairoon ki baanhon se bhi pyaari hain
mujhko ghairoon ki baanhon se bhi pyaari hain | मुझको ग़ैरों की बाँहों से भी प्यारी हैं
- Harsh saxena
मुझको
ग़ैरों
की
बाँहों
से
भी
प्यारी
हैं
तेरी
यादों
में
जो
रातें
गुज़ारी
हैं
- Harsh saxena
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सफ़र
के
बाद
भी
ज़ौक़-ए-सफ़र
न
रह
जाए
ख़याल
ओ
ख़्वाब
में
अब
के
भी
घर
न
रह
जाए
Abhishek shukla
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कभी
पहले
नहीं
था
जिस
क़दर
मजबूर
हूँ
मैं
आज
नज़र
आऊँ
न
ख़ुद
क्या
तुम
सेे
इतना
दूर
हूँ
मैं
आज
तुम्हारे
ज़ख़्म
को
ख़ाली
नहीं
जाने
दिया
मैंने
तुम्हारी
याद
में
ही
चीख़
के
मशहूर
हूँ
मैं
आज
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SHIV SAFAR
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कितने
नादाँ
हैं
तेरे
भूलने
वाले
कि
तुझे
याद
करने
के
लिए
उम्र
पड़ी
हो
जैसे
Ahmad Faraz
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दरमियाँ
हैं
फ़ासले
ये
जानते
हैं
हम
मगर
रात
भर
फिर
भी
हमें
वो
याद
आती
है
बहुत
Amaan Pathan
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तुम्हारी
याद
के
दो
चार
सिक्के
हज़ारों
बार
दिन
में
गिन
रहा
हूँ
Umesh Maurya
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मुद्दतें
हो
गईं
बिछड़े
हुए
तुम
से
लेकिन
आज
तक
दिल
से
मिरे
याद
तुम्हारी
न
गई
Akhtar Shirani
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हम
हार
गए
तुम
जीत
गए
हम
ने
खोया
तुम
ने
पाया
इन
छोटी
छोटी
बातों
का
हम
कोई
ख़याल
नहीं
करते
Wali Aasi
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तन्हाइयाँ
तुम्हारा
पता
पूछती
रहीं
शब-भर
तुम्हारी
याद
ने
सोने
नहीं
दिया
Unknown
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फिर
उसी
सितमगर
को
याद
कर
रहे
हैं
हम
यानी
बे-वजह
ग़म
ईजाद
कर
रहे
हैं
हम
Harsh saxena
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ज़रूरत
सब
कराती
है
मोहब्बत
भी
इबादत
भी
नहीं
तो
कौन
बेमतलब
किसी
को
याद
करता
है
Umesh Maurya
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हम
को
मालूम
है
ये
सब
पगली
झुमकों
में
ढाती
हो
ग़ज़ब
पगली
धड़कने
तेज़
चलने
लगती
हैं
आती
हो
तुम
क़रीब
जब
पगली
किसकी
ख़ातिर
ग़ज़ल
सुनाते
हैं
हम
सेे
मत
पूछो
तुम
सबब
पगली
रात
यूँँ
ही
गुज़र
न
जाए
अब
हमको
बाँहों
में
लोगी
कब
पगली
हिज्र
में
ये
पता
लगा
हम
को
होती
कैसी
है
ये
तलब
पगली
इक
तिरी
याद
ने
सताया
यूँँ
हो
चुके
हैं
शराबी
लब
पगली
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Harsh saxena
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अपने
गले
लगा
ले
मुझे
यार
की
तरह
कब
तक
पड़ा
रहूँगा
यूँँ
बीमार
की
तरह
इल्ज़ाम
जिसके
हिस्से
के
बैठा
हूँ
सर
लिए
वो
देखता
है
मुझको
गुनहगार
की
तरह
आँखों
से
गुफ़्तुगू
की
तमन्ना
तो
है
मगर
नज़रें
हैं
हू-ब-हू
तेरी
तलवार
की
तरह
इक
रूह
की
तलब
मुझे
लाई
थी
मौत
तक
इक
जिस्म
ने
बचा
लिया
हर
बार
की
तरह
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Harsh saxena
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दुनिया
के
भरम
को
कुछ
यूँँ
तोड़
दिया
मैंने
इस
बार
नसीबों
का
रुख़
मोड़
दिया
मैंने
Harsh saxena
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तुम
कभी
मुझको
कलेजे
से
लगाकर
आज़माना
झूठ
कहती
है
ये
दुनिया
आदमी
रोता
नहीं
है
Harsh saxena
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वो
जिसकी
याद
ने
जीना
मुहाल
कर
रखा
है
उसी
की
आस
ने
मुझको
सँभाल
कर
रखा
है
सियाह
रातों
में
साए
से
बातें
करता
है
तुम्हारे
ग़म
ने
नया
रोग
पाल
कर
रखा
है
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Harsh saxena
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