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Abhishek shukla
safar ke baad bhi zauq-e-safar na rah jaa.e
safar ke baad bhi zauq-e-safar na rah jaa.e | सफ़र के बाद भी ज़ौक़-ए-सफ़र न रह जाए
- Abhishek shukla
सफ़र
के
बाद
भी
ज़ौक़-ए-सफ़र
न
रह
जाए
ख़याल
ओ
ख़्वाब
में
अब
के
भी
घर
न
रह
जाए
- Abhishek shukla
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तू
इस
तरह
से
मिला
फिर
मलाल
भी
न
रहा
तेरे
ख़याल
में
अपना
ख़याल
भी
न
रहा
कुछ
इस
अदास
झुकी
थी
हया
से
आँख
तेरी
हमारी
आँख
में
कोई
सवाल
भी
न
रहा
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Subhan Asad
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कैसे
किसी
की
याद
हमें
ज़िंदा
रखती
है
एक
ख़याल
सहारा
कैसे
हो
सकता
है
Jawwad Sheikh
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मेरा
ख़याल
तेरी
चुप्पियों
को
आता
है
तेरा
ख़याल
मेरी
हिचकियों
को
आता
है
Kumar Vishwas
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ख़याल
कब
से
छुपा
के
ये
मन
में
रक्खा
है
मिरा
क़रार
तुम्हारे
बदन
में
रक्खा
है
Siraj Faisal Khan
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करे
जो
क़ैद
जुनूँ
को
वो
जाल
मत
देना
हो
जिस
में
होश
उसे
ऐसा
हाल
मत
देना
जो
मुझ
सेे
मिलने
का
तुमको
कभी
ख़याल
आए
तो
इस
ख़याल
को
तुम
कल
पे
टाल
मत
देना
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Kashif Adeeb Makanpuri
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ख़याल
में
भी
उसे
बे-रिदा
नहीं
किया
है
ये
ज़ुल्म
मुझ
सेे
नहीं
हो
सका
नहीं
किया
है
Ali Zaryoun
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जब
यार
ने
उठा
कर
ज़ुल्फ़ों
के
बाल
बाँधे
तब
मैं
ने
अपने
दिल
में
लाखों
ख़याल
बाँधे
Mohammad Rafi Sauda
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इस
सोच
का
क़ब्ज़ा
मेरे
इदराक
पे
होना
अफ़लाक
पे
होने
के
लिए
ख़ाक
पे
होना
दुनिया
मुझे
पूछे
कि
ये
ख़ुशबू
है
किधर
की
और
मेरा
ख़याल
आपकी
पोशाक
पे
होना
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Ahmad Abdullah
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करता
नहीं
ख़याल
तेरा
इस
ख़याल
से
तंग
आ
गया
अगर
तू
मेरी
देखभाल
से
चल
मेरे
साथ
और
तबीयत
की
फ़िक्र
छोड़
दो
मील
दूर
है
मेरा
घर
अस्पताल
से
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Tehzeeb Hafi
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मरने
का
है
ख़याल
ना
जीने
की
आरज़ू
बस
है
मुझे
तो
वस्ल
के
मौसम
की
जुस्तजू
Muzammil Raza
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मैं
चोट
कर
तो
रहा
हूँ
हवा
के
माथे
पर
मज़ा
तो
जब
था
कि
कोई
निशान
भी
पड़ता
Abhishek shukla
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ये
इम्तियाज़
ज़रूरी
है
अब
इबादत
में
वही
दु'आ
जो
नज़र
कर
रही
है
लब
भी
करें
Abhishek shukla
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लहर
का
ख़्वाब
हो
के
देखते
हैं
चल
तह-ए-अब
हो
के
देखते
हैं
उस
पे
इतना
यक़ीन
है
हम
को
उस
को
बेताब
हो
के
देखते
हैं
रात
को
रात
हो
के
जाना
था
ख़्वाब
को
ख़्वाब
हो
के
देखते
हैं
अपनी
अरज़ानियों
के
सदक़े
हम
ख़ुद
को
नायाब
हो
के
देखते
हैं
साहिलों
की
नज़र
में
आना
है
फिर
तो
ग़र्क़ाब
हो
के
देखते
हैं
वो
जो
पायाब
कह
रहा
था
हमें
उस
को
सैलाब
हो
के
देखते
हैं
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Abhishek shukla
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कभी
कभी
तो
ये
वहशत
भी
हम
पे
गुज़री
है
कि
दिल
के
साथ
ही
देखा
है
डूबना
शब
का
Abhishek shukla
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वो
एक
दिन
जो
तुझे
सोचने
में
गुज़रा
था
तमाम
उम्र
उसी
दिन
की
तर्जुमानी
है
Abhishek shukla
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