phir dil ke aaine men utarne lagii ho tum | फिर दिल के आइने में उतरने लगी हो तुम

  - Tanveer Ghazi
फिरदिलकेआइनेमेंउतरनेलगीहोतुम
शीशेकीधूलउड़ाकेसँवरनेलगीहोतुम
मेरेलिएतोपँखसेहल्कीहोआजभी
कुछलोगकहरहेथेकिभरनेलगीहोतुम
येरूपयेलचकयेचमकऔरयेनमक
शादीकेबा'दऔरनिखरनेलगीहोतुम
मैंकोएलेकीतरहसुलगनेलगाहूँजान
लोबानकेधुएँसीबिखरनेलगीहोतुम
अक्सरमैंदेखताहूँकिशीशेकेशहरस
पत्थरकीपालकीमेंगुज़रनेलगीहोतुम
किससेकहूँकिरूहकेकाग़ज़पेआज-कल
चिंगारियोंकीतरहठहरनेलगीहोतुम
गीलीहैमेरीआँखतोक्यादिलकेदेसमें
पानीकेरास्तेसेउतरनेलगीहोतुम
  - Tanveer Ghazi
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