jo faqat shokhi-e-tahreer bhi ho sakti hai | जो फ़क़त शोख़ी-ए-तहरीर भी हो सकती है

  - Akhtar Shahjahanpuri
जोफ़क़तशोख़ी-ए-तहरीरभीहोसकतीहै
वोमिरेपाँवकीज़ंजीरभीहोसकतीहै
सिर्फ़वीरानाहीग़मगीनीकाबाइ'सेतोनहीं
अहद-ए-माज़ीकीवोतस्वीरभीहोसकतीहै
चश्म-ए-हसरतसेजोटपकीहैलहूकीइकबूँद
सुब्ह-ए-उम्मीदकीतनवीरभीहोसकतीहै
रंज-ओ-ग़मठोकरेंमायूसीघुटनबे-ज़ारी
मेरेख़्वाबोंकीयेता'बीरभीहोसकतीहै
बद-गुमाँहैतोवहीमोरिद-ए-इल्ज़ामहोक्यूँँ
कुछकुछतोमिरीतक़्सीरभीहोसकतीहै
होशक़ाएमरहेंतूफ़ान-ए-हवादिसमेंअगर
बचनिकलजानेकीतदबीरभीहोसकतीहै
तीरगीबख़्तकीसमझोउसेतुम'अख़्तर'
मुल्तफ़ितज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीरभीहोसकतीहै
  - Akhtar Shahjahanpuri
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