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Vikram Sharma
tum muhabbat se nahin mujhse KHafaa ho shaayad
tum muhabbat se nahin mujhse KHafaa ho shaayad | तुम मुहब्बत से नहीं मुझ सेे ख़फ़ा हो शायद
- Vikram Sharma
तुम
मुहब्बत
से
नहीं
मुझ
सेे
ख़फ़ा
हो
शायद
तुम
अगर
चाहो
तो
पिंजरा
भी
बदल
सकते
हो
मुंतज़िर
हूँ
मैं
सो
नंबर
भी
नहीं
बदलूँगा
और
तुम
शहर
का
नक़्शा
भी
बदल
सकते
हो
- Vikram Sharma
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या
वो
थे
ख़फ़ा
हम
से
या
हम
हैं
ख़फ़ा
उन
से
कल
उन
का
ज़माना
था
आज
अपना
ज़माना
है
Jigar Moradabadi
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ज़ब्त
करता
हूँ
तो
घुटता
है
क़फ़स
में
मिरा
दम
आह
करता
हूँ
तो
सय्याद
ख़फ़ा
होता
है
Qamar Jalalvi
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आज
भी
वो
वो
ही
है
और
अदा
भी
वो
ही
है
बे-वफ़ा
भी
वो
ही
है
और
ख़फ़ा
भी
वो
ही
है
Aatish Indori
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किस
किस
को
बताएँगे
जुदाई
का
सबब
हम
तू
मुझ
से
ख़फ़ा
है
तो
ज़माने
के
लिए
आ
Ahmad Faraz
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निभेगी
किस
तरह
दिल
सोचता
है
अजब
लड़की
है
जब
देखो
ख़फ़ा
है
Fuzail Jafri
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इतना
तो
बता
जाओ
ख़फ़ा
होने
से
पहले
वो
क्या
करें
जो
तुम
से
ख़फ़ा
हो
नहीं
सकते
Asad Bhopali
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फ़रिश्तों
से
भी
अच्छा
मैं
बुरा
होने
से
पहले
था
वो
मुझ
से
इंतिहाई
ख़ुश
ख़फ़ा
होने
से
पहले
था
Anwar Shaoor
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अभी
से
मेरे
रफ़ूगर
के
हाथ
थकने
लगे
अभी
तो
चाक
मिरे
ज़ख़्म
के
सिले
भी
नहीं
ख़फ़ा
अगरचे
हमेशा
हुए
मगर
अब
के
वो
बरहमी
है
कि
हम
से
उन्हें
गिले
भी
नहीं
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Parveen Shakir
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यार
इस
में
तो
मज़ा
है
ही
नहीं
कोई
भी
हम
सेे
ख़फ़ा
है
ही
नहीं
इश्क़
ही
इश्क़
है
महसूस
करो
और
कुछ
इसके
सिवा
है
ही
नहीं
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Madhyam Saxena
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न
कोई
गिला
है,
न
तुम
से
ख़फ़ा
है
ग़मे-दिल
की
अब
के
न
कोई
दवा
है
Sukeshini Budhawne
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जिन
से
उठता
नहीं
कली
का
बोझ
उन
के
कंधों
पे
ज़िन्दगी
का
बोझ
वक़्त
जब
हाथ
में
नहीं
रहता
किस
लिए
हाथ
पर
घड़ी
का
बोझ
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Vikram Sharma
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जब
भी
करती
थी
वो
नदी
बातें
करती
थी
सिर्फ़
प्यास
की
बातें
हम
कि
चेहरे
तो
भूल
जाते
हैं
याद
रह
जाती
हैं
कई
बातें
फूल
देखें
तो
याद
आती
हैं
आपकी
ख़ुशबुओं
भरी
बातें
बीती
बातों
पे
ऐसे
शे'र
कहो
शे'र
से
निकले
कुछ
नई
बातें
आपकी
चुप
तो
जानलेवा
हैं
मुझ
सेे
कहिए
भली
बुरी
बातें
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Vikram Sharma
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ग़म-ज़दा
दिल
पे
लतीफ़े
भी
नहीं
खुलते
हैं
तेज़
तूफ़ान
में
छाते
भी
नहीं
खुलते
हैं
दिल
की
जानिब
से
भी
आवाज़
नहीं
आती
है
हम
पे
दुनिया
के
इशारे
भी
नहीं
खुलते
हैं
इश्क़
में
वापसी
आसान
नहीं
होती
है
यहाँ
से
आगे
के
रस्ते
भी
नहीं
खुलते
हैं
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Vikram Sharma
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उम्र
के
आख़िरी
मक़ाम
में
हम
मिल
भी
जाए
तो
क्या
ख़ुशी
होगी
क्या
सितम
तुम
को
देखने
के
लिए
हम
को
दुनिया
भी
देखनी
होगी
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Vikram Sharma
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मशवरा
है
ये
बेहतरी
के
लिए
हम
बिछड़
जाते
हैं
अभी
के
लिए
प्यास
ले
जाती
है
नदी
की
तरफ़
कोई
जाता
नहीं
नदी
के
लिए
ज़िंदगी
की
मैं
कर
रहा
था
क्लास
बस
रजिस्टर
में
हाज़िरी
के
लिए
आप
दीवार
कह
रहे
हैं
जिसे
रास्ता
है
वो
छिपकली
के
लिए
क़ैस
ने
मेरी
पैरवी
की
है
दश्त-ओ-सहरा
में
नौकरी
के
लिए
नील
से
पहले
चाँद
पर
मौजूद
एक
बुढ़िया
थी
मुख़बिरी
के
लिए
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Vikram Sharma
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