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Vikram Sharma
jab bhi karti thii vo nadi baatein
jab bhi karti thii vo nadi baatein | जब भी करती थी वो नदी बातें
- Vikram Sharma
जब
भी
करती
थी
वो
नदी
बातें
करती
थी
सिर्फ़
प्यास
की
बातें
हम
कि
चेहरे
तो
भूल
जाते
हैं
याद
रह
जाती
हैं
कई
बातें
फूल
देखें
तो
याद
आती
हैं
आपकी
ख़ुशबुओं
भरी
बातें
बीती
बातों
पे
ऐसे
शे'र
कहो
शे'र
से
निकले
कुछ
नई
बातें
आपकी
चुप
तो
जानलेवा
हैं
मुझ
सेे
कहिए
भली
बुरी
बातें
- Vikram Sharma
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दूर
से
ही
बस
दरिया
दरिया
लगता
है
डूब
के
देखो
कितना
प्यासा
लगता
है
Waseem Barelvi
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कौन
डूबेगा
किसे
पार
उतरना
है
'ज़फ़र'
फ़ैसला
वक़्त
के
दरिया
में
उतर
कर
होगा
Ahmad Zafar
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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बातचीत
में
आला
हो
बस
ठीक
न
हो
फ़ाइदा
क्या
महबूब
अगर
बारीक
न
हो
हम
तेरी
क़ुर्बत
में
अक्सर
सोचते
हैं
दरिया
खेत
के
इतना
भी
नज़दीक
न
हो
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Khurram Afaq
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इस
नदी
की
धार
में
ठंडी
हवा
आती
तो
है
नाव
जर्जर
ही
सही,
लहरों
से
टकराती
तो
है
Dushyant Kumar
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हम
भी
दरिया
हैं
हमें
अपना
हुनर
मालूम
है
जिस
तरफ़
भी
चल
पड़ेंगे
रास्ता
हो
जाएगा
Bashir Badr
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कोई
समुन्दर,
कोई
नदी
होती,
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता?
Tehzeeb Hafi
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वो
इतना
शांत
दरिया
था
मगर
जब
गया
तो
ले
गया
सब
कुछ
बहा
के
Siddharth Saaz
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उसी
वक़्त
अपने
क़दम
मोड़
लेना
नदी
पार
से
जब
इशारा
करूँँगा
Siddharth Saaz
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जिन
से
उठता
नहीं
कली
का
बोझ
उन
के
कंधों
पे
ज़िंदगी
का
बोझ
वक़्त
जब
हाथ
में
नहीं
रहता
किस
लिए
हाथ
पर
घड़ी
का
बोझ
ब्याह
के
वक़्त
की
कोई
फोटो
गहनों
के
बोझ
पर
हँसी
का
बोझ
सर
पे
यादों
की
टोकरी
रख
ली
कम
न
होने
दिया
कमी
का
बोझ
मिन्नतें
क्यूँ
करे
ख़ुदास
अब
आदमी
बाँटे
आदमी
का
बोझ
ज़ब्त
का
बाँध
टूट
जाने
दो
कम
करो
आँख
से
नमी
का
बोझ
हिज्र
था
एक
ही
घड़ी
का
पर
दिल
से
उतरा
न
उस
घड़ी
का
बोझ
हम
को
ऐसे
ख़ुदा
क़ुबूल
नहीं
जिन
से
उठता
नहीं
ख़ुदी
का
बोझ
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Vikram Sharma
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तुम
मुहब्बत
से
नहीं
मुझ
सेे
ख़फ़ा
हो
शायद
तुम
अगर
चाहो
तो
पिंजरा
भी
बदल
सकते
हो
मुंतज़िर
हूँ
मैं
सो
नंबर
भी
नहीं
बदलूँगा
और
तुम
शहर
का
नक़्शा
भी
बदल
सकते
हो
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Vikram Sharma
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सोचता
हूँ
कि
दिल-ए-ज़ार
का
मतलब
क्या
है
एक
हँसते
हुए
बीमार
का
मतलब
क्या
है
आप
कहते
हैं
कि
दीवार
गिरा
दी
जाए
आप
की
नज़रों
में
दीवार
का
मतलब
क्या
है
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Vikram Sharma
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मिरे
किरदार
जाने
दे
नज़रअंदाज
कर
दे
ख़ुदा
की
फ़िल्म
है
ये
आदमी
से
क्या
शिकायत
Vikram Sharma
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ग़मों
की
सूई
में
यादें
पिरोकर
उदासी
ने
बुना
है
मेरा
स्वेटर
किसी
तन्हाई
का
बेताल
मुझ
सेे
है
लिपटा
नाम
के
धोके
में
आकर
तेरे
जज़्बों
को
लफ़्ज़ों
का
फ़लक
दे
क़फ़स
से
इन
परिंदों
को
रिहा
कर
ज़ियादा
वज़्न
है
टूटे
न
कश्ती
बचा
ले
ख़ुद
को
तू
मुझको
गिराकर
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Vikram Sharma
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