ik umr bhatkte rahe ghar hi nahin aaya | इक उम्र भटकते रहे घर ही नहीं आया

  - Akhtar Shahjahanpuri
इकउम्रभटकतेरहेघरहीनहींआया
साहिलकीतमन्नाथीनज़रहीनहींआया
रौशनहैंजहाँशम-ए-मोहब्बतकीक़तारें
वोकुंज-ए-कम-आसारनज़रहीनहींआया
मैंझूटकोसच्चाईकेपैकरमेंसजाता
क्याकीजिएमुझकोयेहुनरहीनहींआया
वोगुम्बद-ए-बे-दरथाकिदीवार-ए-अनाथी
मंज़रकोईबाहरकानज़रहीनहींआया
इकऐसासफ़रभीमुझेदरपेशथालोगों
कुछकामजहाँज़ाद-ए-सफ़रहीनहींआया
बैठेरहेपलकोंकोबिछाएसर-ए-राहे
वोजान-ए-जहाँ-गश्तइधरहीनहींआया
इकपलकोजहाँबैठाहूँथककरकभी'अख़्तर'
रस्तेमेंकोईऐसाशजरहीनहींआया
  - Akhtar Shahjahanpuri
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