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Nasir Kazmi
is se pahle ki bichhad jaayen ham
is se pahle ki bichhad jaayen ham | इस से पहले कि बिछड़ जाएँ हम
- Nasir Kazmi
इस
से
पहले
कि
बिछड़
जाएँ
हम
दो
क़दम
और
मिरे
साथ
चलो
मुझ
सा
फिर
कोई
न
आएगा
यहाँ
रोक
लो
मुझको
अगर
रोक
सको
- Nasir Kazmi
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महीनों
तक
रहा
करते
थे
सब
मेहमान
आँखों
में,
मगर
अब
ख़्वाब
भी
आते
नहीं
वीरान
आँखों
में
ज़मान
ए
हिज्र
कहने
को
रिवाज़
ए
इश्क़
ही
तो
है,
मगर
क्या
क्या
नहीं
होता
है
इस
दौरान
आँखों
में
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Darpan
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तू
परिंदा
है
किसी
शाख़
को
घर
कर
लेगा
जो
तेरे
हिज्र
का
मारा
है
किधर
जाएगा
Shadab Javed
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अमीर
इमाम
के
अश'आर
अपनी
पलकों
पर
तमाम
हिज्र
के
मारे
उठाए
फिरते
हैं
Ameer Imam
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हिज्र
में
अब
वो
रात
हुई
है
जिस
में
मुझको
ख़्वाबों
में
रेल
की
पटरी,
चाकू,
रस्सी,
बहती
नदियाँ
दिखती
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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सुब्ह
तक
हिज्र
में
क्या
जानिए
क्या
होता
है
शाम
ही
से
मिरे
क़ाबू
में
नहीं
दिल
मेरा
Jigar Moradabadi
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बता
रहा
है
झटकना
तेरी
कलाई
का
ज़रा
भी
रंज
नहीं
है
तुझे
जुदाई
का
मैं
ज़िंदगी
को
खुले
दिल
से
खर्च
करता
था
हिसाब
देना
पड़ा
मुझको
पाई-पाई
का
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Azhar Faragh
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जहाँ
जो
था
वहीं
रहना
था
उस
को
मगर
ये
लोग
हिजरत
कर
रहे
हैं
Liaqat Jafri
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बचा
के
आँख
बिछड़
जाएँ
उस
से
चुपके
से
अभी
तो
अपनी
तरफ़
ध्यान
भी
ज़ियादा
नहीं
Vipul Kumar
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तुम्हारा
बैग
भी
तय्यार
कर
के
रक्खा
है
अकेली
हिज्र
के
आज़ार
क्यूँ
उठाऊँ
मैं
Zahraa Qarar
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शब-ए-विसाल
बहुत
कम
है
आसमाँ
से
कहो
कि
जोड़
दे
कोई
टुकड़ा
शब-ए-जुदाई
का
Ameer Minai
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उन्हें
सदियों
न
भूलेगा
ज़माना
यहाँ
जो
हादसे
कल
हो
गए
हैं
Nasir Kazmi
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तेरे
आने
का
धोखा
सा
रहा
है
दिया
सा
रात
भर
जलता
रहा
है
अजब
है
रात
से
आँखों
का
आलम
ये
दरिया
रात
भर
चढ़ता
रहा
है
सुना
है
रात
भर
बरसा
है
बादल
मगर
वो
शहर
जो
प्यासा
रहा
है
वो
कोई
दोस्त
था
अच्छे
दिनों
का
जो
पिछली
रात
से
याद
आ
रहा
है
किसे
ढूंढोगे
इन
गलियों
में
नासिर
चलो
अब
घर
चलें
दिन
जा
रहा
है
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Nasir Kazmi
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ज़रा
सी
बात
सही
तेरा
याद
आ
जाना
ज़रा
सी
बात
बहुत
देर
तक
रुलाती
थी
Nasir Kazmi
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मुसलसल
बेकली
दिल
को
रही
है
मगर
जीने
की
सूरत
तो
रही
है
मैं
क्यूँँ
फिरता
हूँ
तन्हा
मारा
मारा
ये
बस्ती
चैन
से
क्यूँँ
सो
रही
है
चले
दिल
से
उम्मीदों
के
मुसाफ़िर
ये
नगरी
आज
ख़ाली
हो
रही
है
न
समझो
तुम
इसे
शोर-ए-बहाराँ
ख़िज़ाँ
पत्तों
में
छुप
कर
रो
रही
है
हमारे
घर
की
दीवारों
पे
'नासिर'
उदासी
बाल
खोले
सो
रही
है
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Nasir Kazmi
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आज
देखा
है
तुझको
देर
के
बा'द
आज
का
दिन
गुज़र
न
जाए
कहीं
Nasir Kazmi
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