mujhe vo gham hai ki saari zameen rone lage | मुझे वो ग़म है कि सारी ज़मीन रोने लगे

  - Yasir Khan
मुझेवोग़महैकिसारीज़मीनरोनेलगे
जोअश्कपोंछदूँतोआस्तीनरोनेलगे
तुम्हेंपताहैमैंऐसीजगहभीहँसआया
जहाँपेज़ब्तकेसबमाहिरीनरोनेलगे
मदारीजानताथाआख़िरीतमाशाहै
सोखेलऐसाकियानाज़िरीनरोनेलगे
तिरेलबोंपेउदासीथीएकलम्हेको
तिरीहँसीकेसभीशाएक़ीनरोनेलगे
कुछऐसेक़ैदकियाहैघरोंमेंक़ुदरतने
मकानहँसनेलगेऔरमकीनरोनेलगे
  - Yasir Khan
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