hooñ aañkhen ek KHvaab pe qurbaan karke KHush | हूँ आँखें एक ख़्वाब पे क़ुर्बान करके ख़ुश

  - Yasir Khan
हूँआँखेंएकख़्वाबपेक़ुर्बानकरकेख़ुश
औरजिस्मनज़्र-ए-आतिश-ए-विज्दानकरकेख़ुश
येतुमभीजानतेहोकिहारानहींहूँमैं
होजाओअपनीजीतकाएलानकरकेख़ुश
मैंउसकोभूलनेकेइरादेसेहूँदुखी
होताहैकौनजंगकाएलानकरकेख़ुश
सबलुत्फ़लेरहेहैंउदासीकाशहरमें
हैंलोगअपनेसोगकासामानकरकेख़ुश
करतेहैंलोगजंगयहाँइश्क़केलिए
हमलोगइश्क़जंगकेदौरानकरकेख़ुश
  - Yasir Khan
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