aankhoñ ko kuchh KHvaab dikha kar maanenge | आँखों को कुछ ख़्वाब दिखा कर मानेंगे

  - Yasir Khan
आँखोंकोकुछख़्वाबदिखाकरमानेंगे
आपहमारेहोशउड़ाकरमानेंगे
लगताहैयेपानीबेचनेवालेलोग
हरबस्तीमेंआगलगाकरमानेंगे
तुझकोछूनेकीचाहतमेंदीवाने
शायदअपनेहाथजलाकरमानेंगे
तयतोयेथापिछलीबातेंभूलनीहैं
आपमगरसबयाददिलाकरमानेंगे
घरकाझगड़ागरबाहरजाएगा
बाहरवालेअंदरकरमानेंगे
चाहेफिरआवाज़चलीजाएलेकिन
हमउसकोआवाज़लगाकरमानेंगे
घरपक्काकरनेकीबातेंकरतेहैं
या'नीवोदीवारउठाकरमानेंगे
  - Yasir Khan
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