Faizi Nizam Puri

Faizi Nizam Puri

@faizi-nizam-puri

Faizi Nizam Puri shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Faizi Nizam Puri's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

0

Content

7

Likes

0

Shayari
Audios
  • Ghazal
ग़म-ए-जानाँकेसिवाकुछहमेंप्याराहुआ
हमकिसीकेहुएकोईहमाराहुआ
क्याउसीकाहैवफ़ानाम-ए-मोहब्बतहैयही
मेहरबाँहमपेकभीवोसितम-आराहुआ
लाखतूफ़ान-ए-हवादिसनेक़दमथामलिए
मेरीग़ैरतकोपलटनाभीगवाराहुआ
दिलवहीदिलहैहक़ीक़तकीनज़रमेंदिल
सर्दजिसदिलमेंमोहब्बतकाशराराहुआ
ढूँढताआएगाकलअहल-ए-मोहब्बतकोयही
ग़मनहींआजज़मानाजोहमाराहुआ
अहल-ए-दुनियानेमसर्रतहीमसर्रतचाही
हमकोइसग़मकेसिवाकुछभीगवाराहुआ
जानदीहैदिल-ए-ख़ुद्दारनेकिसमुश्किलसे
आजबालींपेवोख़ुद-बीन-ओ-ख़ुद-आराहुआ
आँखसू-ए-हरम-ओ-दैरकभीउठजातीइश्क़कीराहमेंयेभीतोगवाराहुआ
ख़ाकछानीचमन-ओ-दश्तकीबरसों'फ़ैज़ी'
आहतस्कीन-ए-नज़रकोईनज़ाराहुआ
Read Full
Faizi Nizam Puri
कोईतसव्वुरमेंजल्वा-गरहैबहारदिलमेंसमारहीहै
नफ़सनफ़सगुनगुनारहाहैनज़रनज़रमुस्कुरारहीहै
झुकीझुकीसीनिगाह-ए-क़ातिलहज़ारग़म्ज़ेदिखारहीहै
जानेजागाहैबख़्तकिसकायेकिसकोबिस्मिलबनारहीहै
नहींहैअबताब-ए-ज़ब्तबाक़ीकहींमैंतौबातोड़बैठूँ
तिराइशारानहींयेसाक़ीतोक्यूँँघटामुस्कुरारहीहै
पूछहालतमरीज़-ए-ग़मकीघड़ीमेंकुछहैघड़ीमेंकुछहै
तबीबतशवीशमेंपड़ाहैक़ज़ाखड़ीमुस्कुरारहीहै
मिरीशब-ए-ग़मकापूछनाक्याअजीबपेश-ए-नज़रहैमंज़र
येज़िंदगीझिलमिलारहीहैकिनींदतारोंकोरहीहै
येहरअदापाएमालहोकरभीदिलकोहैज़ौक़-ए-पाएमाली
क़दमक़दमपरतिरीजवानीअजीबफ़ित्नेजगारहीहै
हवाकुछऐसीचलीहै'फ़ैज़ी'तमीज़अपनोंकीअबहैमुश्किल
मिरीतमन्नाभीकुछख़फ़ाहैवफ़ाभीदामनछुड़ारहीहै
Read Full
Faizi Nizam Puri
फिरज़बान-ए-इश्क़चश्म-ए-ख़ूँ-फिशाँहोनेलगी
फिरहदीस-ए-दिलसर-ए-महफ़िलबयाँहोनेलगी
फिरकिसीकीशोख़नज़रोंनेकियाझुककरसलाम
फिरमोहब्बतसाज़-ए-दिलपेनग़्मा-ख़्वाँहोनेलगी
फिरकिसीकीयादआईफिरहुएआँसूरवाँ
फिरसितारोंकीचमकदिलपरगराँहोनेलगी
फिरतसव्वुरमेंकोईआनेलगाहैबार-बार
फिरमिरीउम्मीदकीदुनियाजवाँहोनेलगी
फिरचमनमेंग़ुंचा-ए-नौरसनेलींअंगड़ाइयाँ
फिरसुरूद-अफ़ज़ाबहार-ए-गुलिस्ताँहोनेलगी
फिरपुकाराचाँद-तारोंनेमुझेशाम-ए-फ़िराक़
फिरनिगाह-ए-शौक़नज़्र-ए-आसमाँहोनेलगी
फिरकिसीकादामन-ए-रंगींहैमेराहाथहै
फिरदिल-ए-पुर-शौक़कीहसरतअयाँहोनेलगी
फिरसमायाहैमिरीनज़रोंमेंवोमाह-ए-मुबीं
फिरनिगाह-ए-दिलजवाब-ए-आसमाँहोनेलगी
फिरघटाउठनेलगीतौबाकेफिरलालेपड़े
फिरख़ुशामदतेरीपीर-ए-मुग़ाँहोनेलगी
फिरचलादीवाना'फ़ैज़ी'कू-ए-जानाँकीतरफ़
फिरजुनून-ए-इश्क़कीहालतअयाँहोनेलगी
Read Full
Faizi Nizam Puri
गुलोंकेचेहरा-ए-रंगींपेवोनिखारनहीं
बहारआईमगरआलम-ए-बहारनहीं
जोहाथआताहैदामनतोछोड़देताहूँ
जुनूँ-नवाज़अभीमौसम-ए-बहारनहीं
किसीकीयादकाआलमपूछिएमुझसे
कभीक़रारहैदिलकोकभीक़रारनहीं
येबाँकपनयेअदायेशबाबकाआलम
तुमगएतोकिसीकाअबइंतिज़ारनहीं
बहारपरभीख़िज़ाँहीकारंगग़ालिबहै
हवाज़मानेकीगुलशनकोसाज़गारनहीं
हमारेसामनेवोहैंकहींयेख़्वाबहो
अबअपनीआँखोंपेभीहमकोए'तिबारनहीं
ख़ुदगएहैंसिमटकरनिगाहमेंजल्वे
विसाल-ए-दोस्तहैयेरंज-ए-इंतिज़ारनहीं
मिरामज़ाक़उड़ाताहैआईनालेकिन
मिरीहक़ीक़त-ए-ग़मउसपेआश्कारनहीं
हमारीआबला-पाईकाफ़ैज़क्याकहिए
वोकौनसाहैबयाबाँजोलाला-ज़ारनहीं
बुतोंकोपूजरहाहैतिरेतसव्वुरमें
गुनाहकरकेभी'फ़ैज़ी'गुनाहगारनहीं
Read Full
Faizi Nizam Puri