kuchh zindagi men lutf ka saamaan nahin raha | कुछ ज़िंदगी में लुत्फ़ का सामाँ नहीं रहा

  - Faizi Nizam Puri
कुछज़िंदगीमेंलुत्फ़कासामाँनहींरहा
दिलऐसाबुझगयाकोईअरमाँनहींरहा
वोजोश-ए-बे-ख़ुदीकाहैआलमकिआज-कल
ज़िंदाँमेंहमनहींहैंकिज़िंदाँनहींरहा
वोदिलहीक्याख़लिशहीहोजिसमेंदर्दकी
वोगुलहीक्याजोज़ीनत-ए-दामाँनहींरहा
हरइंक़लाबवक़्तकेसाँचेमेंढलगया
मरकज़पेअपनेअबकोईइंसाँनहींरहा
हरएकअपनाख़ूनपिएजारहाहैआज
इंसानइसज़मानेमेंइंसाँनहींरहा
होतीहैअबतरन्नुम-ए-दिलकशपेवाहवाह
बज़्म-ए-सुख़नमेंकोईसुख़न-दाँनहींरहा
लायाहैउसकोखींचकेशौक़-ए-अदबयहाँ
'फ़ैज़ी'कभीभीदादकाख़्वाहाँनहींरहा
  - Faizi Nizam Puri
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