phir zabaan-e-ishq chashm-e-khoon-fishaan hone lagii | फिर ज़बान-ए-इश्क़ चश्म-ए-ख़ूँ-फिशाँ होने लगी

  - Faizi Nizam Puri
फिरज़बान-ए-इश्क़चश्म-ए-ख़ूँ-फिशाँहोनेलगी
फिरहदीस-ए-दिलसर-ए-महफ़िलबयाँहोनेलगी
फिरकिसीकीशोख़नज़रोंनेकियाझुककरसलाम
फिरमोहब्बतसाज़-ए-दिलपेनग़्मा-ख़्वाँहोनेलगी
फिरकिसीकीयादआईफिरहुएआँसूरवाँ
फिरसितारोंकीचमकदिलपरगराँहोनेलगी
फिरतसव्वुरमेंकोईआनेलगाहैबार-बार
फिरमिरीउम्मीदकीदुनियाजवाँहोनेलगी
फिरचमनमेंग़ुंचा-ए-नौरसनेलींअंगड़ाइयाँ
फिरसुरूद-अफ़ज़ाबहार-ए-गुलिस्ताँहोनेलगी
फिरपुकाराचाँद-तारोंनेमुझेशाम-ए-फ़िराक़
फिरनिगाह-ए-शौक़नज़्र-ए-आसमाँहोनेलगी
फिरकिसीकादामन-ए-रंगींहैमेराहाथहै
फिरदिल-ए-पुर-शौक़कीहसरतअयाँहोनेलगी
फिरसमायाहैमिरीनज़रोंमेंवोमाह-ए-मुबीं
फिरनिगाह-ए-दिलजवाब-ए-आसमाँहोनेलगी
फिरघटाउठनेलगीतौबाकेफिरलालेपड़े
फिरख़ुशामदतेरीपीर-ए-मुग़ाँहोनेलगी
फिरचलादीवाना'फ़ैज़ी'कू-ए-जानाँकीतरफ़
फिरजुनून-ए-इश्क़कीहालतअयाँहोनेलगी
  - Faizi Nizam Puri
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