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Nishant Singh
ab bichhadne par samajh paate hain ham ik doosre ko
ab bichhadne par samajh paate hain ham ik doosre ko | अब बिछड़ने पर समझ पाते हैं हम इक दूसरे को
- Nishant Singh
अब
बिछड़ने
पर
समझ
पाते
हैं
हम
इक
दूसरे
को
इम्तिहाँ
के
ख़त्म
हो
जाने
पे
हल
याद
आ
रहा
है
- Nishant Singh
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ये
करिश्मा
हुआ
चूमने
से
उसे
तीरगी
पर
खुली
रोशनी
की
समझ
Neeraj Neer
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जब
ज़रा
रात
हुई
और
मह
ओ
अंजुम
आए
बार-हा
दिल
ने
ये
महसूस
किया
तुम
आए
Asad Bhopali
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महसूस
कर
रहा
था
उसे
अपने
आस
पास
अपना
ख़याल
ख़ुद
ही
बदलना
पड़ा
मुझे
Ameer Qazalbash
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लोग
औरत
को
फ़क़त
जिस्म
समझ
लेते
हैं
रुह
भी
होती
है
उस
में
ये
कहाँ
सोचते
हैं
Sahir Ludhianvi
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दर्द
में
शिद्दत-ए-एहसास
नहीं
थी
पहले
ज़िंदगी
राम
का
बन-बास
नहीं
थी
पहले
Shakeel Azmi
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इक
दूसरे
को
छोड़
के
जाने
की
बात
है
अपनी
नहीं
ये
सारे
ज़माने
की
बात
है
बस
यूँँ
समझ
लो
उन
सेे
मेरा
कद
बलंद
है
जिनके
लबों
पे
मुझको
गिराने
की
बात
है
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Kashif Sayyed
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फ़िक्र-ए-ईजाद
में
गुम
हूँ
मुझे
ग़ाफ़िल
न
समझ
अपने
अंदाज़
पर
ईजाद
करूँँगा
तुझ
को
Jaun Elia
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जिस्म
के
पार
जाना
पड़ा
था
कभी
इश्क़
कर
के
हुई
बंदगी
की
समझ
Neeraj Neer
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ये
नहीं
है
कि
वो
एहसान
बहुत
करता
है
अपने
एहसान
का
एलान
बहुत
करता
है
आप
इस
बात
को
सच
ही
न
समझ
लीजिएगा
वो
मेरी
जान
मेरी
जान
बहुत
करता
है
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Jawwad Sheikh
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शिकस्ता
नाव
समझ
कर
डुबोने
वाले
लोग
न
पा
सके
मुझे
साहिल
पे
खोने
वाले
लोग
ज़रा
सा
वक़्त
जो
बदला
तो
हम
पे
हँसने
लगे
हमारे
काँधे
पे
सर
रख
के
रोने
वाले
लोग
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Kashif Sayyed
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सिर्फ़
इतनी
सी
गुंजाइश
है
वस्ल
दिखने
की
जैसे
इत्तिफ़ाक़न
बारिश
में
धूप
दिख
जाए
Nishant Singh
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फिर
रोक
देगा
कोई
मुझको
गुफ़्तगू
के
बीच
में
दोबारा
फिर
इक
बार
मेरी
बात
टल
जाएगी
क्या
Nishant Singh
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ख़ैरात
में
अब
दे
दिया
जाए
इसे
हर
रात
नीदें
ज़ाया'
होती
रहती
हैं
Nishant Singh
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उदास
चेहरे
पे
इक
नई
उदासी
छा
गई
पहरस
पहले
बाद-ए-सबा
हमें
जगा
गई
अजब
नहीं
जो
लांछनों
से
मैं
बरी
न
हो
सकूँ
सफ़ाई
देने
के
समय
ही
मुझ
को
नींद
आ
गई
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Nishant Singh
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एक
हिस्सा
है
किसी
के
जिस्म
का
हम
में,सो
हम
ख़ुद-कुशी
भी
कर
नहीं
सकते
यूँँ
अपनी
मर्ज़ी
से
Nishant Singh
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