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Nishant Singh
sirf itni si gunjaish hai vasl dikhne ki
sirf itni si gunjaish hai vasl dikhne ki | सिर्फ़ इतनी सी गुंजाइश है वस्ल दिखने की
- Nishant Singh
सिर्फ़
इतनी
सी
गुंजाइश
है
वस्ल
दिखने
की
जैसे
इत्तिफ़ाक़न
बारिश
में
धूप
दिख
जाए
- Nishant Singh
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कच्चा
सा
घर
और
उस
पर
जोरों
की
बरसात
है
ये
तो
कोई
खानदानी
दुश्मनी
की
बात
है
Saahir
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आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
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तन्हा
होना,
गुमसुम
दिखना,
कुछ
ना
कहना...
ठीक
नहीं
अपने
ग़म
को
इतना
सहना,
इतना
सहना...
ठीक
नहीं
आओ
दिल
की
मिट्टी
में
कुछ
दिल
की
बातें
बो
दें
हम
बारिश
के
मौसम
में
गमले
ख़ाली
रहना...
ठीक
नहीं
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Dev Niranjan
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बहुत
मुद्दत
के
बा'द
आई
है
बारिश
और
उस
ज़ालिम
के
पेपर
चल
रहे
हैं
Ahmad Farhad
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उस
ने
बारिश
में
भी
खिड़की
खोल
के
देखा
नहीं
भीगने
वालों
को
कल
क्या
क्या
परेशानी
हुई
Jamal Ehsani
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अब
के
सावन
में
शरारत
ये
मिरे
साथ
हुई
मेरा
घर
छोड़
के
कुल
शहर
में
बरसात
हुई
Gopaldas Neeraj
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धूप
में
कौन
किसे
याद
किया
करता
है
पर
तिरे
शहर
में
बरसात
तो
होती
होगी
Ameer Imam
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वो
अजब
शख़्स
था
हर
हाल
में
ख़ुश
रहता
था
उस
ने
ता-उम्र
किया
हँस
के
सफ़र
बारिश
में
Sahiba sheharyaar
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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जाने
कैसे
ख़ुश
रहने
की
आदत
डाली
जाती
है
उनके
यहाँ
तो
बारिश
में
भी
धूप
निकाली
जाती
है
Ritesh Rajwada
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यक़ीन
हो
रहा
था
सब
को
मुझ
पे
रफ़्ता-रफ़्ता
पर
किसी
ने
मुझ
सेे
भी
ज़ियादा
ही
दिखावा
कर
दिया
Nishant Singh
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कोई
इशारा
गर
हो
तो
रफ़्तार
ये
गिरे
ज़ंजीर
खींच
ट्रेन
को
रोका
जा
सकता
है
Nishant Singh
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उदास
चेहरे
पे
इक
नई
उदासी
छा
गई
पहरस
पहले
बाद-ए-सबा
हमें
जगा
गई
अजब
नहीं
जो
लांछनों
से
मैं
बरी
न
हो
सकूँ
सफ़ाई
देने
के
समय
ही
मुझ
को
नींद
आ
गई
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Nishant Singh
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अब
बिछड़ने
पर
समझ
पाते
हैं
हम
इक
दूसरे
को
इम्तिहाँ
के
ख़त्म
हो
जाने
पे
हल
याद
आ
रहा
है
Nishant Singh
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इक
ज़रा
सी
बात
को
बढ़ा
चढ़ा
बता
दिया
दुख
नहीं
था
उतना
जितना
हमने
ये
दिखा
दिया
खल
रही
थी
धुन
उसे
सो
सांस
अपनी
रोक
ली
नद
ने
सूख
कर
मुसाफ़िरों
को
रास्ता
दिया
मुझ
को
सर्दियों
से
था
बचाने
में
लगा
हुआ
मैंने
फूंक
मार
कर
अलाव
जो
बुझा
दिया
मेरे
मरने
पे
ठहरने
की
जगह
निकल
गई
गीली
उस
ज़मीं
को
मेरी
राख
ने
सुखा
दिया
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Nishant Singh
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