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Saahir
kaccha sa ghar aur us par joron ki barsaat hai
kaccha sa ghar aur us par joron ki barsaat hai | कच्चा सा घर और उस पर जोरों की बरसात है
- Saahir
कच्चा
सा
घर
और
उस
पर
जोरों
की
बरसात
है
ये
तो
कोई
खानदानी
दुश्मनी
की
बात
है
- Saahir
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ख़ास
तो
कुछ
भी
नहीं
बदला
तुम्हारे
बाद
में
पहले
गुम
रहता
था
तुम
में,
अब
तुम्हारी
याद
में
मोल
हासिल
हो
गया
है
मुझको
इक-इक
शे'र
का
सब
दिलासे
दे
रहे
हैं
मुझको
"जस्सर"
दाद
में
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Avtar Singh Jasser
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दश्त
छोड़े
हुए
अब
तो
अर्सा
हुआ
मैं
हूँ
मजनूँ
मगर
नाम
बदला
हुआ
मुझको
औरत
के
दुख
भी
पता
हैं
कि
मैं
एक
लड़का
हूँ
बेवा
का
पाला
हुआ
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Rishabh Sharma
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तुम्हारे
ख़त
में
नया
इक
सलाम
किसका
था
न
था
रक़ीब
तो
आख़िर
वो
नाम
किसका
था
Dagh Dehlvi
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दुश्मनी
का
सफ़र
इक
क़दम
दो
क़दम
तुम
भी
थक
जाओगे
हम
भी
थक
जाएँगे
Bashir Badr
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रंग
बदला
यार
ने
वो
प्यार
की
बातें
गईं
वो
मुलाक़ातें
गईं
वो
चाँदनी
रातें
गईं
Hafeez Jalandhari
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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कुछ
ख़ास
तो
बदला
नहीं
जाने
से
तुम्हारे
बस
राब्ता
कम
हो
गया
फूलों
की
दुकाँ
से
Ashu Mishra
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लुत्फ़
आता
है
बहुत
सोच
के
मुझको
कि
रक़ीब
रंगत-ए-लब
को
तेरी
पान
समझते
होंगे
Ameer Imam
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आप
बच्चों
का
दिल
नहीं
तोड़ें
भाई
ये
दुश्मनी
हमारी
है
Vishnu virat
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मैं
चाहता
यही
था
सब
चाह
ख़त्म
हो
अब
फिर
चाहकर
तुम्हें
बदला
ये
ख़याल
मेरा
Abhay Aadiv
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अपने
गाँव
बैठ
कर
सोच
रहा
था
मैं
ये
सब
कौन
ख़रीदेगा
अब
उस
शहरी
औरत
के
फूल
Saahir
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उम्र
का
हर
इक
पड़ाव
कुछ
यूँँ
देखा
है
मैने
देखे
हैं
मैने
उगते
खिलते
और
झड़ते
फूल
Saahir
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ख़ून
माँगे
रोज़
मुझ
सेे
शा'इरी
अब
दूर
रक्खो
आप
मुझको
ऐसे
फ़न
से
Saahir
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मौत
सड़क
पर
राह
देखती
है
मेरी
अबके
गुज़रा
तो
फिर
मरना
पक्का
है
Saahir
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उसका
नाम
सुनाई
देने
की
वजह
मेरे
पड़ोस
की
छोटी
बच्ची
है
दोस्त
मेरे
ख़यालों
में
ही
पक्कापन
है
मेरी
उम्र
अभी
भी
कच्ची
है
दोस्त
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Saahir
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