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Nishant Singh
ik zaraa si baat ko badha chadha bataa diya
ik zaraa si baat ko badha chadha bataa diya | इक ज़रा सी बात को बढ़ा चढ़ा बता दिया
- Nishant Singh
इक
ज़रा
सी
बात
को
बढ़ा
चढ़ा
बता
दिया
दुख
नहीं
था
उतना
जितना
हमने
ये
दिखा
दिया
खल
रही
थी
धुन
उसे
सो
सांस
अपनी
रोक
ली
नद
ने
सूख
कर
मुसाफ़िरों
को
रास्ता
दिया
मुझ
को
सर्दियों
से
था
बचाने
में
लगा
हुआ
मैंने
फूंक
मार
कर
अलाव
जो
बुझा
दिया
मेरे
मरने
पे
ठहरने
की
जगह
निकल
गई
गीली
उस
ज़मीं
को
मेरी
राख
ने
सुखा
दिया
- Nishant Singh
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तुझे
न
आएँगी
मुफ़्लिस
की
मुश्किलात
समझ
मैं
छोटे
लोगों
के
घर
का
बड़ा
हूॅं
बात
समझ
Umair Najmi
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जिस
की
बातों
के
फ़साने
लिक्खे
उस
ने
तो
कुछ
न
कहा
था
शायद
Ada Jafarey
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इक
लड़की
से
बात
करो
तो
लगता
है
इस
दुनिया
को
छोड़
के
भी
इक
दुनिया
है
Shadab Asghar
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न
उसने
हाथ
लगाया
न
उसने
बातें
कीं
पड़े
पड़े
यूँँ
ही
ख़ुद
में
ख़राब
हो
गए
हम
Abhishek shukla
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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है
कुछ
ऐसी
ही
बात
जो
चुप
हूँ
वर्ना
क्या
बात
कर
नहीं
आती
Mirza Ghalib
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तन्हा
होना,
गुमसुम
दिखना,
कुछ
ना
कहना...
ठीक
नहीं
अपने
ग़म
को
इतना
सहना,
इतना
सहना...
ठीक
नहीं
आओ
दिल
की
मिट्टी
में
कुछ
दिल
की
बातें
बो
दें
हम
बारिश
के
मौसम
में
गमले
ख़ाली
रहना...
ठीक
नहीं
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Dev Niranjan
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जहान
भर
में
न
हो
मुयस्सर
जो
कोई
शाना,
हमें
बताना
नहीं
मिले
गर
कोई
ठिकाना
तो
लौट
आना,
हमें
बताना
कुछ
ऐसी
बातें
जो
अनकही
हों,
मगर
वो
अंदर
से
खा
रही
हों
लगे
किसी
को
बताना
है
पर
नहीं
बताना,
हमें
बताना
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Vikram Gaur Vairagi
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बात
ये
है
कि
आदमी
शाइर
या
तो
होता
है
या
नहीं
होता
Mahboob Khizan
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फिर
आज
यारों
ने
तुम्हारी
बात
की
फिर
यार
महफ़िल
में
मिरी
खिल्ली
उड़ी
Harsh saxena
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दिल
डरा
ही
देने
वाले
जैसे
दहशत
के
मनाज़िर
देखता
हूँ
मैं
ये
कैसे
कैसे
क़ुदरत
के
मनाज़िर
कर
नहीं
सकती
मुतासिर
तुझ
को
मेरी
शा'इरी
ये
तूने
देखे
ही
नहीं
हैं
एक
ख़ल्वत
के
मनाज़िर
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Nishant Singh
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एक
हिस्सा
है
किसी
के
जिस्म
का
हम
में,सो
हम
ख़ुद-कुशी
भी
कर
नहीं
सकते
यूँँ
अपनी
मर्ज़ी
से
Nishant Singh
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फिर
रोक
देगा
कोई
मुझको
गुफ़्तगू
के
बीच
में
दोबारा
फिर
इक
बार
मेरी
बात
टल
जाएगी
क्या
Nishant Singh
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बारहा
हादसों
से
जाना
है
आस
रखना
भी
एक
आदत
है
Nishant Singh
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कोई
इशारा
गर
हो
तो
रफ़्तार
ये
गिरे
ज़ंजीर
खींच
ट्रेन
को
रोका
जा
सकता
है
Nishant Singh
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