dil jal ke rah ga.e zakn-e-rashk-e-maah par | दिल जल के रह गए ज़क़न-ए-रश्क-ए-माह पर

  - Taashshuq Lakhnavi
दिलजलकेरहगएज़क़न-ए-रश्क-ए-माहपर
इसक़ाफ़िलाकोप्यासनेमाराहैचाहपर
गेसूकोनाज़हैदिल-ए-रौशनकीचाहपर
परवानायेचराग़हैमार-ए-सियाहपर
नींदउड़गईगिराँहैयेशबरश्क-ए-माहपर
बिजलीक्यूँँफ़लकसेगिरेमेरीआहपर
हैयादख़ुफ़्तगान-ए-ज़मींकाजोख़त्त-ए-सब्ज़
भूलेसेमैंक़दमनहींरखतागियाहपर
लुटताहैख़ाना-ए-दिल-ए-आशिक़बचाइए
बिगड़ीहुईहैफ़ौज-ए-मिज़ाकिसगुनाहपर
तासीरकाहैख़ौफ़उन्हेंऐनशौक़में
हैदिलपेहाथकानहैंआवाज़-ए-आहपर
महशरबपाहैबंदहैंकुश्तोंकेरास्ते
क़दबाढ़परहैबाढ़हैतेग़-ए-निगाहपर
क्याआदमीकीख़ाककोरौंदूँमैंरहम-दिल
रोताहैपाएमाली-ए-मर्दुम-गियाहपर
कहतेहोकिसकेक़ल्बमेंउठताहैशबकोदर्द
रोताहैदिलमिरामिरेहाल-ए-तबाहपर
आख़िरतलाश-ए-गोरहुईदिलकोइश्क़में
बरसोंतबाहहोकेअबआयाहैराहपर
दिलकेमुआमलेमेंहोदख़्लग़ैरको
लेनाजोहोतोलीजिएअपनीनिगाहपर
ऊपरकीसाँसलेनेकाआज़ारहोगया
जिसकीनज़रपड़ीतिरीतिरछीनिगाहपर
बख़ियाजराहत-ए-दिल-ए-नाज़ुक-मिज़ाजका
मौक़ूफ़हैहुज़ूरकेतार-ए-निगाहपर
  - Taashshuq Lakhnavi
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