mehfil se uthaane ke saza-waar humeen the | महफ़िल से उठाने के सज़ा-वार हमीं थे

  - Taashshuq Lakhnavi
महफ़िलसेउठानेकेसज़ा-वारहमींथे
सबफूलतिरेबाग़थेइकख़ारहमींथे
हमकिसकोदिखातेशब-ए-फ़ुर्क़तकीउदासी
सबख़्वाबमेंथेरातकोबेदारहमींथे
सौदातिरीज़ुल्फ़ोंकागयासाथहमारे
मरकरभीछूटेवोगिरफ़्तारहमींथे
कलरातकोदेखाथाजिसेख़्वाबमेंतुमने
रुख़्सारपेरक्खेहुएरुख़्सारहमींथे
दिल-सोख़्ताथेचाहनेवालोंमेंतुम्हारे
लेकिनसबब-ए-गर्मी-ए-बाज़ारहमींथे
कलकूचा-ए-क़ातिलमेंजोथाख़ल्क़कामजमा
खाएहुएउसहाथकीतलवारहमींथे
इश्क़-ए-मिज़ाकौनहमेंदेखनेआता
आँखोंमेंखटकतेथेवोबीमारहमींथे
तुर्बतमेंभीआँखेंहुईंबंदहमारी
ऐसेतिरेइकतालिब-ए-दीदारहमींथे
ठंडेकिएग़ैरोंकेदिलऔरहमकोजलाया
इकथेतोमोहब्बतकेगुनहगारहमींथे
मिलतेहीलब-ए-यारसेलबदिलनिकलआया
माराजिसेईसानेवोबीमारहमींथे
तुमग़ैरोंसेडरडरकेलिपटजातेथेपैहम
कलरातकोनालाँपस-ए-दीवारहमींथे
सबराज़'तअश्शुक़'सेबयाँहोतेथेदिलके
पहलेतिरेइकमहरम-ए-असरारहमींथे
  - Taashshuq Lakhnavi
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