kab apni khushi se vo aa.e hue hain | कब अपनी ख़ुशी से वो आए हुए हैं

  - Taashshuq Lakhnavi
कबअपनीख़ुशीसेवोआएहुएहैं
मिरेजज़्ब-ए-दिलकेबुलाएहुएहैं
कजीपरजोअफ़्लाकआएहुएहैं
उनआँखोंकेशायदसिखाएहुएहैं
कभीतोशहीदोंकीक़ब्रोंपेआओ
येसबघरतुम्हारेबसाएहुएहैं
कियाहैजोकुछज़िक्रमुझदिल-जलेका
पसीनेमेंबिल्कुलनहाएहुएहैं
ज़राफूलसेपाँवमैलेहोंगे
तुमआओहमआँखेंबिछाएहुएहैं
कहींख़ाकभीअबबैठेगीअपनी
किउनकीगलीसेउठाएहुएहैं
गिरेगाज़मींपेख़ून-ए-शहीदाँ
अबसआपदामनउठाएहुएहैं
फ़क़तपासहैउनकेतीर-ए-निगहका
जोसीनेसेदिलकोलगाएहुएहैं
जनाज़ामिरादोस्तोकलउठाना
किवोआजमेहंदीलगाएहुएहैं
उन्हेंपासहैदिलहमारामुक़र्रर
वहीहमसेआँखेंचुराएहुएहैं
जोहैघरकेअंदरवहीघरकेबाहर
वोआँखोंमेंदिलमेंसमाएहुएहैं
मेरेब'अदजानेकेउतरेंगेक्यूँँ-कर
येकपड़ेजोमेरेपिन्हाएहुएहैं
होसब्ज़ा-रंगोंमेंक्यूँँउनकीशोहरत
मिरेक़त्लपरज़हरखाएहुएहैं
मिरेख़तकेपुर्ज़ेउड़ाएउन्होंने
किसीकेसिखाएपढ़ाएहुएहैं
ख़ुदाज़ुल्फ़सेदिलजिगरकोबचाए
बड़ेपेचमेंदोनोंआएहुएहैं
तड़पकरशब-ए-हिज्रमेंक्यूँँरोऊँ
चमकतीहीबर्क़अब्रआएहुएहैं
'तअश्शुक़'वोजोचाहेंबातेंसुनाएँ
सर-ए-इज्ज़हमतोझुकाएहुएहैं
  - Taashshuq Lakhnavi
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