uns hai khaana-e-sayyaad se gulshan kaisa | उन्स है ख़ाना-ए-सय्याद से गुलशन कैसा

  - Taashshuq Lakhnavi
उन्सहैख़ाना-ए-सय्यादसेगुलशनकैसा
नाज़-पर्वर्द-ए-क़फ़सहूँमैंनशेमनकैसा
हमवोउर्यांहैंकिवाक़िफ़नहींजोश-ए-जुनूँ
नामकिसशयकागरेबानहैदामनकैसा
अपनीआज़ुर्दा-दिलीब'अद-ए-फ़नाकामआई
ढेरयहाँगर्द-ए-कुदूरतकेहैंमदफ़नकैसा
कहदियाबसकितिरीआहमेंतासीरनहीं
येदेखाकियेसीनामेंहैरौज़नकैसा
छुटकेउसफूलसेबर्बादपड़ेफिरतेहैं
हमतोअबताइर-ए-निगहतहैंनशेमनकैसा
दिलउसेदेकेचलेमुल्क-ए-अदमकोबे-ख़ौफ़
मालरखतेनहींअंदेशा-ए-रहज़नकैसा
दिल-ए-बेताबकीहैसीना-ए-सोज़ाँमेंसदा
अस्लपाराकीहैक्यादाना-ए-गुलख़नकैसा
थाकभीदौर-ए-असीरान-ए-क़फ़ससय्याद
अबतोइकफूलकीमुहताजहैंगुलशनकैसा
चारदिनमेंयेज़मानाभीगुज़रजाएगा
अभीरोएँगेजवानीकोलड़कपनकैसा
सख़्त-जाँहैंतिरीतलवारसेक्याख़ौफ़हमें
सख़्ती-ए-मर्गसेदबतेनहींआहनकैसा
जलगएसूरत-ए-परवानातबइश्क़सेहम
फेंकदेलाशउठाकरकोईमदफ़नकैसा
एकदिनअबलक़-ए-अय्यामकरेगापामाल
मुझसेरहरहकेबिगड़ताहैयेतौसनकैसा
इश्क़सेकामथाहुस्नकीपर्वाभीथी
यादआताहैजवानीमेंलड़कपनकैसा
खेलतेहोदिल-ए-बेताबसेफूलोंकीतरह
औरहोताहैमिरीजानलड़कपनकैसा
शम्असेआपकेसोज़ाँयेसुनाकरतेहैं
कोईमुहताज-ए-कफ़नभीहोमदफ़नकैसा
चाहताहूँकोईदेखेतेरीतेग़केज़ख़्म
चश्म-ए-जर्राहहैक्यादीदा-ए-सोज़नकैसा
नक़्श-ए-पाहैंहवस-ए-नाम-ओ-निशाँख़ाकनहीं
हमतोउठनेकेलिएबैठेहैंमस्कनकैसा
आँधियाँगर्मजोचलतीहैंमिरीआहोंसे
मुँहछुपाताहैचराग़-ए-तह-ए-दामनकैसा
सीनाअपनाहैहमारादिल-ए-सोज़ाँअपना
शम्-ए-फ़ानूसचराग़-ए-तह-ए-दामनकैसा
दूरजबसेसिफ़त-ए-बर्ग-ए-ख़िज़ाँ-दीदाहै
यादआताहैशब-ओ-रोज़वोगुलशनकैसा
  - Taashshuq Lakhnavi
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