apni farhat ke din ai yaar chale aate hain | अपनी फ़रहत के दिन ऐ यार चले आते हैं

  - Taashshuq Lakhnavi
अपनीफ़रहतकेदिनयारचलेआतेहैं
कैफ़ियतपरगुल-ए-रुख़्सारचलेआतेहैं
पड़गईक्यानिगह-ए-मस्ततिरेसाक़ीकी
लड़खड़ातेहुएमय-ख़्वारचलेआतेहैं
यादकींनश्शामेंडूबीहुईआँखेंकिसकी
ग़शतुझेदिल-ए-बीमारचलेआतेहैं
राहमेंसाहिब-ए-इक्सीरखड़ेहैंमुश्ताक़
ख़ाकसारान-ए-दर-ए-यारचलेआतेहैं
बाग़मेंफूलहँसेदेतेहैंबेदर्दीसे
नाला-ए-मुर्ग़-ए-गिरफ़्तारचलेआतेहैं
देखकरअबरू-ए-ख़मदारफिरेयूँँ'आशिक़
ग़ुलहैखाएहुएतलवारचलेआतेहैं
जिसतरहनर्ग़ेमेंचलतेहैंग़ज़ाल-ए-सहरा
यूँँतिरीचश्मकेबीमारचलेआतेहैं
हूँवोबे-ख़ुदकियेहैनाला-ए-सोज़ाँपेगुमाँ
शोला-ए-आतिश-ए-रुख़्सारचलेआतेहैं
चाहिएशोर-ए-क़यामतपए-ताज़ीमउठ्ठे
आपकेआशिक़-ए-रफ़्तारचलेआतेहैं
शोरसुनतेहैंजोहमचाक-गरेबानोंका
बंदखोलेसर-ए-बाज़ारचलेआतेहैं
हरतरफ़हश्रमेंझंकारहैज़ंजीरोंकी
उनकीज़ुल्फ़ोंकेगिरफ़्तारचलेआतेहैं
चलगईतेग़-ए-निगहआज'तअश्शुक़'पेज़रूर
लोगउसकूचासेख़ूँ-बारचलेआतेहैं
  - Taashshuq Lakhnavi
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