soo-e-dariya khanda-zan vo yaar-e-jaani phir gaya | सू-ए-दरिया ख़ंदा-ज़न वो यार-ए-जानी फिर गया

  - Taashshuq Lakhnavi
सू-ए-दरियाख़ंदा-ज़नवोयार-ए-जानीफिरगया
मोतियोंकीआबरूपरआजपानीफिरगया
सूइयाँसीकुछदिल-ए-वहशीमेंफिरचुभनेलगीं
ठीकहोनेकोलिबास-ए-अर्ग़वानीफिरगया
हथकड़ीभारीहैमेरेहाथकीआजजुनूँ
दस्त-ए-जानाँकाकहींछल्लानिशानीफिरगया
ज़ोरपैदाकरकिपहुँचेजेबतकदस्त-ए-जुनूँ
अबतोमौसमवफ़ूर-ए-ना-तवानीफिरगया
सरफ़रोशान-ए-मोहब्बतसेहोगीआँखचार
मुँहजोउसकीतेग़कासख़्त-जानीफिरगया
कहतेहोहमआजमुल्क-ए-हुस्नकेहैंबादशाह
क्याहुमाबाला-ए-सरयार-ए-जानीफिरगया
क्यूँँकबूतरकेएवज़हुदहुदलायाख़त्त-ए-शौक़
इसख़तापरमुझसेवोबिल्क़ीस-ए-सानीफिरगया
बोसाकैसाइकलब-ए-शीरींसेगालीभीदी
आजफिरउम्मीद-वार-ए-मेहरबानीफिरगया
ज़ईफ़ीसायासरपरसेगयाधूपगई
फ़स्लबदलीआफ़्ताब-ए-ज़िंदगानीफिरगया
गिरपड़ेआँसूउरूज-ए-माह-ए-कामिलदेखकर
मिरीनज़रोंमेंतिराअहद-ए-जवानीफिरगया
  - Taashshuq Lakhnavi
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