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Alankrat Srivastava
aankh ki bebaasi dil ka dar dekhna
aankh ki bebaasi dil ka dar dekhna | आँख की बेबसी दिल का डर देखना
- Alankrat Srivastava
आँख
की
बेबसी
दिल
का
डर
देखना
तुम
किसी
दिन
ग़रीबों
का
घर
देखना
- Alankrat Srivastava
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दूर
इक
सितारा
है
और
वो
हमारा
है
आँख
तक
नहीं
लगती
कोई
इतना
प्यारा
है
छू
के
देखना
उसको
क्या
अजब
नज़ारा
है
तीर
आते
रहते
थे
फूल
किसने
मारा
है
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Kafeel Rana
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मैंने
बस
इतना
पूछा
था
क्या
देखते
हो
भला
मैंने
ये
कब
कहा
था
मुझे
देखना
छोड़
दो
Tajdeed Qaiser
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बातें
दवा
का
काम
कर
सकतीं
हैं
यार
बीमार
से
तुम
बात
करके
देखना
Shubhangi kalii
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फ़ुज़ूल-ख़र्ची
नहीं
करेंगे
Rehman Faris
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सलीक़ा
तो
नहीं
मालूम
हम
को
दीद
का
लेकिन
झुकाती
है
नज़र
को
जब
नज़र
भर
देखते
हैं
हम
Sandeep dabral 'sendy'
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सरफ़रोशी
की
तमन्ना
अब
हमारे
दिल
में
है
देखना
है
ज़ोर
कितना
बाज़ू-ए-क़ातिल
में
है
Bismil Azimabadi
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मेरी
नींदें
उड़ा
रक्खी
है
तुम
ने
ये
कैसे
ख़्वाब
दिखलाती
हो
जानाँ
किसी
दिन
देखना
मर
जाऊँगा
मैं
मेरी
क़स
में
बहुत
खाती
हो
जानाँ
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Subhan Asad
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कमाल
ये
है
मुझे
देखती
हैं
वो
आँखें
मलाल
ये
है
उन्हें
देखना
नहीं
आता
Dilawar Ali Aazar
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ये
कैसी
इश्तियाक़-ए-दीद
है
मेरी
निग़ाहों
की
उन्हें
ही
देखना
चाहें,
झुकें
भी
सामने
उनके
Kiran K
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आँखों
को
मूँद
लेने
से
ख़तरा
न
जाएगा
वो
देखना
पड़ेगा
जो
देखा
न
जाएगा
Waseem Barelvi
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फ़लां
ने
कहा
है
फ़लाने
से
हैं
हम
की
हुलिए
से
देखो
दिवाने
से
हैं
हम
हैं
सुनते
नहीं
अब
तो
हम
भी
किसी
की
बुरा
इस
में
क्या
है
ज़माने
से
हैं
हम
हमें
सुन
के
लोगों
को
राहत
मिलेगी
रफ़ी
के
किसी
प्यारे
गाने
से
हैं
हम
यहाँ
हम
सा
दूजा
कहाँ
से
मिलेगा
नई
सी
है
दुनिया
पुराने
से
हैं
हम
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Alankrat Srivastava
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हमारे
दरमियाँ
जो
प्यार
से
पहले
की
यारी
थी
बिछड़
कर
अब
ये
लगता
है
वो
यारी
ज़्यादा
प्यारी
थी
बिछड़ना
उसकी
मर्ज़ी
थी,
उसे
उतरन
न
कहना
तुम
वो
अब
उतनी
ही
उसकी
है
वो
तब
जितनी
तुम्हारी
थी
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Alankrat Srivastava
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कैसे
कह
दूँ
कि
जीवन
से
ग़म
दूर
हैं
सच
तो
ये
है
कि
तुम
और
हम
दूर
हैं
हम
मिलेंगे
दुबारा
से
अगले
जनम
ग़म
यही
है
की
अगले
जनम
दूर
हैं
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Alankrat Srivastava
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चार
मिसरे
जो
उस्ताद
ने
थे
दिए
पढ़
के
उस्ताद
ख़ुद
को
बताने
लगे
Alankrat Srivastava
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बिन
तेरे
मेरा
घर
भी
लगे
घर
नहीं
ऐसा
मानो
की
पंछी
हो
पर,
पर
नहीं
जल
महल
हो
या
हो
आगरा
का
किला
तुम
सा
शीतल
नहीं
तुम
सा
सुंदर
नहीं
पार्थ
का
नाम
है
हर
गली
हर
नगर
पर
वो
नैनों
से
बेहतर
धनुर्धर
नहीं
रक्त
बहता
रहा
साँस
थमती
रही
झुक
गया
था
बदन
पर
झुका
सर
नहीं
क्यूँ
मेरी
बेवफ़ाई
पे
हैरान
हो?
मैं
कोई
देवता
या
पयंबर
नहीं
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Alankrat Srivastava
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