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Tehzeeb Hafi
guzar chuki julmate shab-e-hijr par badan men vo teergii hai
guzar chuki julmate shab-e-hijr par badan men vo teergii hai | गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है
- Tehzeeb Hafi
गुजर
चुकी
जुल्मते
शब-ए-हिज्र,
पर
बदन
में
वो
तीरगी
है
मैं
जल
मरुंगा
मगर
चिरागों
के
लो
को
मध्यम
नहीं
करूँगा
यह
अहद
लेकर
ही
तुझ
को
सौंपी
थी
मैंने
कलबौ
नजर
की
सरहद
जो
तेरे
हाथों
से
कत्ल
होगा
मैं
उस
का
मातम
नहीं
करूँगा
- Tehzeeb Hafi
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सियाह
रात
की
सरहद
के
पार
ले
गया
है
अजीब
ख़्वाब
था
आँखें
उतार
ले
गया
है
है
अब
जो
ख़ल्क़
में
मजनूँ
के
नाम
से
मशहूर
वो
मेरी
ज़ात
से
वहशत
उधार
ले
गया
है
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Abhishek shukla
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मोहब्बत
की
तो
कोई
हद,
कोई
सरहद
नहीं
होती
हमारे
दरमियाँ
ये
फ़ासले,
कैसे
निकल
आए
Khalid Moin
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इस
ज़माने
में
भी
इक
लड़का
तुम्हें
यूँँ
चाहता
है
अपने
रब
से
वो
तुम्हारी
जैसी
बेटी
माँगता
है
तुम
भला
उस
प्रेम
की
गहराई
क्या
समझोगे
जानाँ
जो
कभी
ख़्वाबों
में
भी
अपनी
न
सरहद
लाँघता
है
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Harsh saxena
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तुम
भला
उस
प्रेम
की
गहराई
क्या
समझोगे
जानाँ
जो
कभी
ख़्वाबों
में
भी
अपनी
न
सरहद
लाँघता
है
Harsh saxena
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कहाँ
हम
ग़ज़ल
का
हुनर
जानते
हैं
मगर
इस
ज़बाँ
का
असर
जानते
हैं
ये
वो
हुस्न
जिसको
निखारा
गया
है
नया
कुछ
नहीं
हम
ख़बर
जानते
हैं
कि
है
जो
क़फ़स
में
वो
पंछी
रिहा
हो
परिंदें
ज़मीं
के
शजर
जानते
हैं
फ़क़त
रूह
के
नाम
है
इश्क़
लेकिन
बदन
के
हवाले
से
घर
जानते
हैं
फ़ुलाँ
है
फ़ुलाँ
का
यक़ीं
हैं
हमें
भी
सुनो
हम
उसे
सर-ब-सर
जानते
हैं
कि
अब
यूँँ
सिखाओ
न
रस्म-ए-सियासत
झुकाना
कहाँ
है
ये
सर
जानते
हैं
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Neeraj Neer
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अँधेरों
की
हुक़ूमत
ख़ुद
ब
ख़ुद
ही
ख़त्म
होनी
है
क़लम
को
हाथ
में
शमशीर
के
मानिंद
समझो
तो
Sameer Goyal
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बाज़
बनना
है
तो
फिर
कद
भूल
जा
आँख
में
रख
लक्ष्य
और
हद
भूल
जा
किसलिए
डरता
है
दीवारों
से
तू
आ
समाँँ
को
देख
सरहद
भूल
जा
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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उस
मुल्क
की
सरहद
को
कोई
छू
नहीं
सकता
जिस
मुल्क
की
सरहद
की
निगहबान
हैं
आँखें
Unknown
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फिर
नए
साल
की
सरहद
पे
खड़े
हैं
हम
लोग
राख
हो
जाएगा
ये
साल
भी
हैरत
कैसी
Aziz Nabeel
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हमारा
ख़ून
का
रिश्ता
है
सरहदों
का
नहीं
हमारे
ख़ून
में
गँगा
भी
चनाब
भी
है
Kanval Ziai
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जाने
वाले
से
राब्ता
रह
जाए
घर
की
दीवार
पर
दिया
रह
जाए
इक
नज़र
जो
भी
देख
ले
तुझ
को
वो
तिरे
ख़्वाब
देखता
रह
जाए
इतनी
गिर्हें
लगी
हैं
इस
दिल
पर
कोई
खोले
तो
खोलता
रह
जाए
कोई
कमरे
में
आग
तापता
हो
कोई
बारिश
में
भीगता
रह
जाए
नींद
ऐसी
कि
रात
कम
पड़
जाए
ख़्वाब
ऐसा
कि
मुँह
खुला
रह
जाए
झील
सैफ़-उल-मुलूक
पर
जाऊँ
और
कमरे
में
कैमरा
रह
जाए
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Tehzeeb Hafi
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जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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वो
जिस
की
छाँव
में
पच्चीस
साल
गुज़रे
हैं
वो
पेड़
मुझ
से
कोई
बात
क्यूँँ
नहीं
करता
Tehzeeb Hafi
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तुझको
बतलाता
मगर
शर्म
बहुत
आती
है
तेरी
तस्वीर
से
जो
काम
लिया
जाता
है
Tehzeeb Hafi
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सो
रहेंगे
के
जागते
रहेंगे
हम
तेरे
ख़्वाब
देखते
रहेंगे
तू
कही
और
ही
ढूंढता
रहेंगा
हम
कही
और
ही
खिले
रहेंगे
राहगीरों
ने
राह
बदलनी
है
पेड़
अपनी
जगह
खड़े
रहेंगे
सभी
मौसम
है
दस्तरस
में
तेरी
तूने
चाहा
तो
हम
हरे
रहेंगे
लौटना
कब
है
तूने
पर
तुझको
आदतन
ही
पुकारते
रहेंगे
तुझको
पाने
में
मसअला
ये
है
तुझको
खोने
के
वस्वसे
रहेंगे
तू
इधर
देख
मुझ
सेे
बाते
कर
यार
चश्में
तो
फूटते
रहेंगे
एक
मुद्दत
हुई
है
तुझ
सेे
मिले
तू
तो
कहता
था
राब्ते
रहेंगे
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Tehzeeb Hafi
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