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Sameer Goyal
andheron ki hukumat khud b khud hi khatm honi hai
andheron ki hukumat khud b khud hi khatm honi hai | अँधेरों की हुक़ूमत ख़ुद ब ख़ुद ही ख़त्म होनी है
- Sameer Goyal
अँधेरों
की
हुक़ूमत
ख़ुद
ब
ख़ुद
ही
ख़त्म
होनी
है
क़लम
को
हाथ
में
शमशीर
के
मानिंद
समझो
तो
- Sameer Goyal
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हमने
ग़ज़लों
में
हुक़ूमत
को
लिखी
है
'लानत
धमकियाँ
आती
हैं,
इनआम
तो
आने
से
रहा
Harman Dinesh
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बाज़
बनना
है
तो
फिर
कद
भूल
जा
आँख
में
रख
लक्ष्य
और
हद
भूल
जा
किसलिए
डरता
है
दीवारों
से
तू
आ
समाँँ
को
देख
सरहद
भूल
जा
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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तुम
भला
उस
प्रेम
की
गहराई
क्या
समझोगे
जानाँ
जो
कभी
ख़्वाबों
में
भी
अपनी
न
सरहद
लाँघता
है
Harsh saxena
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फिर
नए
साल
की
सरहद
पे
खड़े
हैं
हम
लोग
राख
हो
जाएगा
ये
साल
भी
हैरत
कैसी
Aziz Nabeel
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इस
ज़माने
में
भी
इक
लड़का
तुम्हें
यूँँ
चाहता
है
अपने
रब
से
वो
तुम्हारी
जैसी
बेटी
माँगता
है
तुम
भला
उस
प्रेम
की
गहराई
क्या
समझोगे
जानाँ
जो
कभी
ख़्वाबों
में
भी
अपनी
न
सरहद
लाँघता
है
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Harsh saxena
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कहाँ
हम
ग़ज़ल
का
हुनर
जानते
हैं
मगर
इस
ज़बाँ
का
असर
जानते
हैं
ये
वो
हुस्न
जिसको
निखारा
गया
है
नया
कुछ
नहीं
हम
ख़बर
जानते
हैं
कि
है
जो
क़फ़स
में
वो
पंछी
रिहा
हो
परिंदें
ज़मीं
के
शजर
जानते
हैं
फ़क़त
रूह
के
नाम
है
इश्क़
लेकिन
बदन
के
हवाले
से
घर
जानते
हैं
फ़ुलाँ
है
फ़ुलाँ
का
यक़ीं
हैं
हमें
भी
सुनो
हम
उसे
सर-ब-सर
जानते
हैं
कि
अब
यूँँ
सिखाओ
न
रस्म-ए-सियासत
झुकाना
कहाँ
है
ये
सर
जानते
हैं
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Neeraj Neer
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कुछ
रिश्तों
में
दिल
को
आज़ादी
नइँ
होती
कुछ
कमरों
में
रौशनदान
नहीं
होता
है
Vikram Gaur Vairagi
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हमारा
ख़ून
का
रिश्ता
है
सरहदों
का
नहीं
हमारे
ख़ून
में
गँगा
भी
चनाब
भी
है
Kanval Ziai
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मोहब्बत
की
तो
कोई
हद,
कोई
सरहद
नहीं
होती
हमारे
दरमियाँ
ये
फ़ासले,
कैसे
निकल
आए
Khalid Moin
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उस
मुल्क
की
सरहद
को
कोई
छू
नहीं
सकता
जिस
मुल्क
की
सरहद
की
निगहबान
हैं
आँखें
Unknown
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हर
इक
शय
में
वो
तुझको
देखता
है
इलाही
क्या
वो
लड़का
बावरा
है
उसे
दीवानगी
है
क़ैस
की
सी
तपे
सहरा
में
'लैला'
चीखता
है
उखड़ती
जा
रही
है
सांस
उसकी
ज़बाँ
से
नाम
तेरा
बोलता
है
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Sameer Goyal
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बहुत
दिनों
तक
मर
जाने
से
डरता
था
जब
तक
ख़ुद
को
तेरा
समझा
करता
था
मेरी
बातें
आज
अखरती
है
तुझको
तू
तो
मेरी
बात
बात
पर
मरता
था
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Sameer Goyal
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दुनिया
वहशत
देर
से
समझा
करती
है
प्रेमी
पहले
दिन
से
पागल
होता
है
तन्हाई
की
लू
में
मुझको
साया
दे
केवल
तेरी
याद
का
आँचल
होता
है
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Sameer Goyal
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ख़ामोशी
बस
ख़ामोशी
हो,ऐसा
भी
हो
सकता
है
लेकिन
कोई
बात
छुपी
हो,ऐसा
भी
हो
सकता
है
हो
सकता
है
सारी
दलीलें
तेरी
सच
हों,
लेकिन
फिर
जो
मैं
सोचूं
बात
वही
हो,ऐसा
भी
हो
सकता
है
मजबूरी
का
फ़क़त
दिखावा
करके
रोने
वाले
की
सच
में
कोई
मजबूरी
हो
ऐसा
भी
हो
सकता
है
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Sameer Goyal
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इतनी
ज़हमत
कौन
उठाये
सन्नाटे
से
बात
करे
ख़ुद
अपने
ज़ख़्मों
से
उलझे
दर्द
से
दो
दो
हाथ
करे
आँख
उठाकर
जब
से
तूने
उस
बादल
को
देखा
है
सावन
में
सूखा
घू
में
है
फागुन
में
बरसात
करे
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Sameer Goyal
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