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Sameer Goyal
itni zahmat kaun uthaaye sannaate se baat kare
itni zahmat kaun uthaaye sannaate se baat kare | इतनी ज़हमत कौन उठाये सन्नाटे से बात करे
- Sameer Goyal
इतनी
ज़हमत
कौन
उठाये
सन्नाटे
से
बात
करे
ख़ुद
अपने
ज़ख़्मों
से
उलझे
दर्द
से
दो
दो
हाथ
करे
आँख
उठाकर
जब
से
तूने
उस
बादल
को
देखा
है
सावन
में
सूखा
घू
में
है
फागुन
में
बरसात
करे
- Sameer Goyal
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तूफ़ानों
से
आँख
मिलाओ
सैलाबों
पे
वार
करो
मल्लाहों
का
चक्कर
छोड़ो
तैर
के
दरिया
पार
करो
Rahat Indori
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हुस्न
को
हुस्न
बनाने
में
मिरा
हाथ
भी
है
आप
मुझ
को
नज़र-अंदाज़
नहीं
कर
सकते
Rais Farog
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माँ
जैसे
देखती
हो
तुम
मगर
मैं
तुम्हारी
आँख
का
तारा
नहीं
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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देखो
तो
चश्म-ए-यार
की
जादू-निगाहियाँ
बेहोश
इक
नज़र
में
हुई
अंजुमन
तमाम
Hasrat Mohani
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वो
मेरी
पीठ
में
ख़ंजर
ज़रूर
उतारेगा
मगर
निगाह
मिलेगी
तो
कैसे
मारेगा
Waseem Barelvi
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शाम
से
आँख
में
नमी
सी
है
आज
फिर
आप
की
कमी
सी
है
Gulzar
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आँख
की
बेबसी
दिल
का
डर
देखना
तुम
किसी
दिन
ग़रीबों
का
घर
देखना
Alankrat Srivastava
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नज़ारे
आँख
में
चुभने
लगे
हैं
यहाँ
हम
साथ
आते
थे
तुम्हारे
Nitesh Kushwah
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यूँँ
तो
वो
शख़्स
बिलकुल
बे-गुनह
है
ज़माने
की
मगर
उस
पे
निगह
है
हमारे
दरमियाँ
जो
दूरियाँ
हैं
यक़ीनन
तीसरी
कोई
वजह
है
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Dileep Kumar
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अलग
बैठे
थे
फिर
भी
आँख
साक़ी
की
पड़ी
हम
पर
अगर
है
तिश्नगी
कामिल
तो
पैमाने
भी
आएँगे
Majrooh Sultanpuri
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कमज़र्फ़ों
से
बात
में
ख़तरा
रहता
है
ख़ुद
का
ही
मेयार
गिराना
पड़ता
है
Sameer Goyal
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उस
सेे
ज़्यादा
भार
भला
होगा
किस
पर
दे
औलाद
को
कंधा
बाप
जो
लौटा
हो
Sameer Goyal
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अँधेरों
की
हुक़ूमत
ख़ुद
ब
ख़ुद
ही
ख़त्म
होनी
है
क़लम
को
हाथ
में
शमशीर
के
मानिंद
समझो
तो
Sameer Goyal
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ख़ामोशी
बस
ख़ामोशी
हो,ऐसा
भी
हो
सकता
है
लेकिन
कोई
बात
छुपी
हो,ऐसा
भी
हो
सकता
है
हो
सकता
है
सारी
दलीलें
तेरी
सच
हों,
लेकिन
फिर
जो
मैं
सोचूं
बात
वही
हो,ऐसा
भी
हो
सकता
है
मजबूरी
का
फ़क़त
दिखावा
करके
रोने
वाले
की
सच
में
कोई
मजबूरी
हो
ऐसा
भी
हो
सकता
है
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Sameer Goyal
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जीना
मेरा
बहुत
कठिन
है
मरना
भी
आसान
नहीं
यूँँ
लगता
है
चंद
दिनों
में
जीते
जी
मर
जाऊँँगा
इश्क़
में
टूटा
'आशिक़
हूँ
मैं
मुझ
सेे
दूर
ही
रहना
तुम
जो
करने
का
कहते
हैं
सब
मैं
सच
में
कर
जाऊँँगा
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Sameer Goyal
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