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Nitesh Kushwah
nazare aankh men chubhne lage hain
nazare aankh men chubhne lage hain | नज़ारे आँख में चुभने लगे हैं
- Nitesh Kushwah
नज़ारे
आँख
में
चुभने
लगे
हैं
यहाँ
हम
साथ
आते
थे
तुम्हारे
- Nitesh Kushwah
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सारी
दुनिया
ने
तो
नफ़रत
से
पुकारा
मुझको
माँ
समझती
है
मगर
आँख
का
तारा
मुझको
Muneer shehryaar
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हम
जिसे
देखते
रहते
थे
उम्र
भर
काश
वो
इक
नज़र
देखता
हम
को
भी
Mohsin Ahmad Khan
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इतने
दुख
से
भरी
है
ये
दुनिया
आँख
खुलते
ही
आँख
भर
आए
shampa andaliib
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आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
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ज़िंदगी
इक
फ़िल्म
है
मिलना
बिछड़ना
सीन
हैं
आँख
के
आँसू
तिरे
किरदार
की
तौहीन
हैं
Sandeep Thakur
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कबूतर
इश्क़
का
उतरे
तो
कैसे?
तुम्हारी
छत
पे
निगरानी
बहुत
है
इरादा
कर
लिया
गर
ख़ुद-कुशी
का
तो
ख़ुद
की
आँख
का
पानी
बहुत
है
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Kumar Vishwas
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सखी
को
हमारी
नज़र
लग
न
जाए
उसे
ख़्वाब
में
रात
भर
देखते
हैं
Sahil Verma
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लग
गई
मुझको
नज़र
बेशक़
तुम्हारी
आईनों
मैं
बहुत
ख़ुश
था
किसी
इक
सिलसिले
से
उन
दिनों
Aarush Sarkaar
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चुरायगा
उसी
से
आँख
क़ातिल
ज़रा
सी
जान
जिस
बिस्मिल
में
होगी
Dagh Dehlvi
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ये
भी
मुमकिन
है
मियाँ
आँख
भिगोने
लग
जाऊँ
वो
कहे
कैसे
हो
तुम
और
मैं
रोने
लग
जाऊँ
ऐ
मेरी
आँख
में
ठहराए
हुए
वस्ल
के
ख़्वाब
मैं
तवातुर
से
तेरे
साथ
न
सोने
लग
जाऊँ
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Ejaz Tawakkal Khan
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उनको
आसान
ही
लगूँगा
मैं
जिनसे
बस
चाय
तक
का
रिश्ता
है
Nitesh Kushwah
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उस
ने
जब
बन-सँवर
के
दस्तक
दी
यूँँ
लगा
सीधे
दिल
पे
दस्तक
दी
दौड़
कर
खोलते
थे
दरवाज़ा
सोचते
थे
कि
तू
ने
दस्तक
दी
उस
ने
खिड़की
से
भी
नहीं
झाँका
उम्र
भर
जिस
के
दर
पे
दस्तक
दी
रात
पथराई
भीगी
आँखों
में
ख़्वाब
के
क़ाफ़िले
ने
दस्तक
दी
मैं
ने
दरवाज़ा
ही
नहीं
खोला
रात
फिर
ख़ुद-कुशी
ने
दस्तक
दी
ज़िंदगी
कर
गई
ग़ज़ल
पूरी
मौत
के
क़ाफ़िए
ने
दस्तक
दी
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Nitesh Kushwah
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तू
सब
कुछ
जानने
वाला
अकेला
बता,
फिर
क्यूँँ
हूँ
मैं
इतना
अकेला
तेरी
चाहत
में
तेरे
ग़म
भी
चाहे
कभी
तुझको
नहीं
चाहा
अकेला
मैं
महफ़िल
में
हँसाने
वाला
सबको
पसे-पर्दा
बहुत
रोया
अकेला
बदन
हूँ
मैं
अगर
तो
वो
भी
होगा
कभी
होता
नहीं
साया
अकेला
हटा
दी
यार
की
तस्वीर
मैंने
तड़पकर
रो
पड़ा
कमरा
अकेला
वो
अपने
साथ
मुझको
ले
गया
है
मैं
जिसको
छोड़कर
लौटा
अकेला
तमाशा
बन
गई
है
सारी
दुनिया
बचा
मैं
देखने
वाला
अकेला
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Nitesh Kushwah
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