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Sameer Goyal
khaamoshi bas khaamoshi ho,ऐसा bhi ho saka hai
khaamoshi bas khaamoshi ho,ऐसा bhi ho saka hai | ख़ामोशी बस ख़ामोशी हो,ऐसा भी हो सकता है
- Sameer Goyal
ख़ामोशी
बस
ख़ामोशी
हो,ऐसा
भी
हो
सकता
है
लेकिन
कोई
बात
छुपी
हो,ऐसा
भी
हो
सकता
है
हो
सकता
है
सारी
दलीलें
तेरी
सच
हों,
लेकिन
फिर
जो
मैं
सोचूं
बात
वही
हो,ऐसा
भी
हो
सकता
है
मजबूरी
का
फ़क़त
दिखावा
करके
रोने
वाले
की
सच
में
कोई
मजबूरी
हो
ऐसा
भी
हो
सकता
है
- Sameer Goyal
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ग़लत
बातों
को
ख़ामोशी
से
सुनना
हामी
भर
लेना
बहुत
हैं
फ़ाएदे
इस
में
मगर
अच्छा
नहीं
लगता
Javed Akhtar
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यार
सब
जम्अ'
हुए
रात
की
ख़ामोशी
में
कोई
रो
कर
तो
कोई
बाल
बना
कर
आया
Ahmad Mushtaq
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क़स
में,
वादे,
दरवाज़े
तो
ठीक
हैं
पर
ख़ामोशी
को
तोड़
नहीं
सकता
हूँ
मैं
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Tanoj Dadhich
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फिर
ख़मोशी
ने
साज़
छेड़ा
है
फिर
ख़यालात
ने
ली
अँगड़ाई
Javed Akhtar
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उम्र
भर
मेरी
उदासी
के
लिए
काफ़ी
है
जो
सबब
मेरी
ख़मोशी
के
लिए
काफ़ी
है
जान
दे
देंगे
अगर
आप
कहेंगे
हम
सेे
जान
देना
ही
मु'आफ़ी
के
लिए
काफ़ी
है
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Aakash Giri
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बस
ये
हुआ
कि
उस
ने
तकल्लुफ़
से
बात
की
और
हम
ने
रोते
रोते
दुपट्टे
भिगो
लिए
Parveen Shakir
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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ख़मोशी
मेरी
मअनी-ख़ेज़
थी
ऐ
आरज़ू
कितनी
कि
जिस
ने
जैसा
चाहा
वैसा
अफ़्साना
बना
डाला
Arzoo Lakhnavi
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ख़ामोशी
में
आवाज़
का
किरदार
कोई
है
जो
बोलता
रहता
है
लगातार,
कोई
है
Shakeel Gwaliari
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ग़लत
बातों
को
ख़ामोशी
से
सुनना
हामी
भर
लेना
बहुत
हैं
फ़ाएदे
इस
में
मगर
अच्छा
नहीं
लगता
Javed Akhtar
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बहुत
दिनों
तक
मर
जाने
से
डरता
था
जब
तक
ख़ुद
को
तेरा
समझा
करता
था
मेरी
बातें
आज
अखरती
है
तुझको
तू
तो
मेरी
बात
बात
पर
मरता
था
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Sameer Goyal
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पढ़ना
लिखना
अच्छी
आदत
होती
है
मेरे
पढ़ने
से
क्यूँँ
दिक्कत
होती
है
हमवज़्नी
हैं
वीराना
और
दीवाना
इन
दोनों
में
एक
सी
वहशत
होती
है
नज़दीकी
तो
वस्ल
में
भी
थी
तुझ
सेे
पर
हिज्र
में
तुझ
सेे
ज़्यादा
कुर्बत
होती
है
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Sameer Goyal
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ऐसी
कैसी
नाउम्मीदी
उसके
दिल
में
बैठ
गई
इतनी
बातें
करने
वाली
आँखें
क्यूँ
ख़ामोश
हुईं
Sameer Goyal
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हर
इक
शय
में
वो
तुझको
देखता
है
इलाही
क्या
वो
लड़का
बावरा
है
उसे
दीवानगी
है
क़ैस
की
सी
तपे
सहरा
में
'लैला'
चीखता
है
उखड़ती
जा
रही
है
सांस
उसकी
ज़बाँ
से
नाम
तेरा
बोलता
है
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Sameer Goyal
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उकता
गया
है
दिल
मेरा
पा
कर
फ़क़त
बदन
मैं
चाहता
हूँ
कोई
अपनी
रूह
दे
मुझे
Sameer Goyal
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