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Sameer Goyal
ukta gaya hai dil meraa pa kar faqat badan
ukta gaya hai dil meraa pa kar faqat badan | उकता गया है दिल मेरा पा कर फ़क़त बदन
- Sameer Goyal
उकता
गया
है
दिल
मेरा
पा
कर
फ़क़त
बदन
मैं
चाहता
हूँ
कोई
अपनी
रूह
दे
मुझे
- Sameer Goyal
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मिरे
सूरज
आ!
मिरे
जिस्म
पे
अपना
साया
कर
बड़ी
तेज़
हवा
है
सर्दी
आज
ग़ज़ब
की
है
Shahryar
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है
अब
भी
बिस्तर-ए-जाँ
पर
तिरे
बदन
की
शिकन
मैं
ख़ुद
ही
मिटने
लगा
हूँ
उसे
मिटाते
हुए
Azhar Iqbal
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ये
जानते
हैं
ठीक
नहीं
माँग
रहे
हैं
हम
एक
खंडहर
को
मकीं
माँग
रहे
हैं
सब
माँग
रहे
हैं
ख़ुदास
तेरा
जिस्म
और
हम
हैं,
कि
फ़क़त
तेरी
जबीं
माँग
रहे
हैं
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Siddharth Saaz
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हवा
चली
तो
उसकी
शॉल
मेरी
छत
पे
आ
गिरी
ये
उस
बदन
के
साथ
मेरा
पहला
राब्ता
हुआ
Zia Mazkoor
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हम
उस
में
बैठ
के
करते
हैं
साधना
तेरी
हमारा
जिस्म
भी
भीतर
से
एक
शिवाला
है
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Irshad Khan Sikandar
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वक़्त-ए-रुख़्सत
आब-दीदा
आप
क्यूँँ
हैं
जिस्म
से
तो
जाँ
हमारी
जा
रही
है
Azm Shakri
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ये
गहरा
राज़
है
इसका
बदन
को
खा
ही
जाती
है
मोहब्बत
पाक
होकर
भी
हवस
तक
आ
ही
जाती
है
ALI ZUHRI
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मुझे
भी
बख़्श
दे
लहजे
की
ख़ुशबयानी
सब
तेरे
असर
में
हैं
अल्फ़ाज़
सब,
म'आनी
सब
मेरे
बदन
को
खिलाती
है
फूल
की
मानिंद
कि
उस
निगाह
में
है
धूप,
छाँव,
पानी
सब
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Subhan Asad
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ये
जिस्म
तंग
है
सीने
में
भी
लहू
कम
है
दिल
अब
वो
फूल
है
जिस
में
कि
रंग-ओ-बू
कम
है
Pallav Mishra
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उस
साँवले
से
जिस्म
को
देखा
ही
था
कि
बस
घुलने
लगे
ज़बाँ
पे
मज़े
चाकलेट
के
Shahid Kabir
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अँधेरों
की
हुक़ूमत
ख़ुद
ब
ख़ुद
ही
ख़त्म
होनी
है
क़लम
को
हाथ
में
शमशीर
के
मानिंद
समझो
तो
Sameer Goyal
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कमज़र्फ़ों
से
बात
में
ख़तरा
रहता
है
ख़ुद
का
ही
मेयार
गिराना
पड़ता
है
Sameer Goyal
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ख़ामोशी
बस
ख़ामोशी
हो,ऐसा
भी
हो
सकता
है
लेकिन
कोई
बात
छुपी
हो,ऐसा
भी
हो
सकता
है
हो
सकता
है
सारी
दलीलें
तेरी
सच
हों,
लेकिन
फिर
जो
मैं
सोचूं
बात
वही
हो,ऐसा
भी
हो
सकता
है
मजबूरी
का
फ़क़त
दिखावा
करके
रोने
वाले
की
सच
में
कोई
मजबूरी
हो
ऐसा
भी
हो
सकता
है
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Sameer Goyal
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बहुत
दिनों
तक
मर
जाने
से
डरता
था
जब
तक
ख़ुद
को
तेरा
समझा
करता
था
मेरी
बातें
आज
अखरती
है
तुझको
तू
तो
मेरी
बात
बात
पर
मरता
था
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Sameer Goyal
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उस
सेे
ज़्यादा
भार
भला
होगा
किस
पर
दे
औलाद
को
कंधा
बाप
जो
लौटा
हो
Sameer Goyal
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