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Sameer Goyal
padhna likhna achchhii aadat hoti hai
padhna likhna achchhii aadat hoti hai | पढ़ना लिखना अच्छी आदत होती है
- Sameer Goyal
पढ़ना
लिखना
अच्छी
आदत
होती
है
मेरे
पढ़ने
से
क्यूँँ
दिक्कत
होती
है
हमवज़्नी
हैं
वीराना
और
दीवाना
इन
दोनों
में
एक
सी
वहशत
होती
है
नज़दीकी
तो
वस्ल
में
भी
थी
तुझ
सेे
पर
हिज्र
में
तुझ
सेे
ज़्यादा
कुर्बत
होती
है
- Sameer Goyal
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थी
वस्ल
में
भी
फ़िक्र-ए-जुदाई
तमाम
शब
वो
आए
तो
भी
नींद
न
आई
तमाम
शब
Momin Khan Momin
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हिज्र
की
रातें
इतनी
भारी
होती
हैं
जैसे
छाती
पर
ऐरावत
बैठा
हो
Tanoj Dadhich
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काट
पाऊँगा
मैं
कैसे
ज़िंदगी
तेरे
बग़ैर
तीन
दिन
का
हिज्र
मुझ
को
लग
रहा
है
तीन
साल
Afzal Ali Afzal
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वो
फ़िराक़
और
वो
विसाल
कहाँ
वो
शब-ओ-रोज़-ओ-माह-ओ-साल
कहाँ
Mirza Ghalib
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'मुनीर'
अच्छा
नहीं
लगता
ये
तेरा
किसी
के
हिज्र
में
बीमार
होना
Muneer Niyazi
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ये
सानिहा
भी
शब-ए-हिज्र
आ
पड़ा
हम
पर
तेरा
ख़्याल
तो
आया
तेरी
तलब
न
हुई
Subhan Asad
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हम
कहाँ
और
तुम
कहाँ
जानाँ
हैं
कई
हिज्र
दरमियाँ
जानाँ
Jaun Elia
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मुमकिना
फ़ैसलों
में
एक
हिज्र
का
फ़ैसला
भी
था
हमने
तो
एक
बात
की
उसने
कमाल
कर
दिया
Parveen Shakir
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पहले
लगा
था
हिज्र
में
जाएँगे
जान
से
पर
जी
रहे
हैं
और
भी
हम
इत्मीनान
से
Ankit Maurya
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भले
ही
प्यार
हो
या
हिज्र
हो
या
फिर
सियासत
हो
कुछ
ऐसे
दोस्त
थे
हर
बात
पर
अश'आर
कहते
थे
Siddharth Saaz
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बहुत
दिनों
तक
मर
जाने
से
डरता
था
जब
तक
ख़ुद
को
तेरा
समझा
करता
था
मेरी
बातें
आज
अखरती
है
तुझको
तू
तो
मेरी
बात
बात
पर
मरता
था
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Sameer Goyal
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इतनी
ज़हमत
कौन
उठाये
सन्नाटे
से
बात
करे
ख़ुद
अपने
ज़ख़्मों
से
उलझे
दर्द
से
दो
दो
हाथ
करे
आँख
उठाकर
जब
से
तूने
उस
बादल
को
देखा
है
सावन
में
सूखा
घू
में
है
फागुन
में
बरसात
करे
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Sameer Goyal
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उस
सेे
ज़्यादा
भार
भला
होगा
किस
पर
दे
औलाद
को
कंधा
बाप
जो
लौटा
हो
Sameer Goyal
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ऐसी
कैसी
नाउम्मीदी
उसके
दिल
में
बैठ
गई
इतनी
बातें
करने
वाली
आँखें
क्यूँ
ख़ामोश
हुईं
Sameer Goyal
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उकता
गया
है
दिल
मेरा
पा
कर
फ़क़त
बदन
मैं
चाहता
हूँ
कोई
अपनी
रूह
दे
मुझे
Sameer Goyal
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